'मनमोहन सिंह इस हफ़्ते जाएंगे काबुल'

मनमोहन सिंह, हामिद करज़ई(फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption मनमोहन सिंह का काबुल दौरा बहुत अहम माना जा रहा है.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस हफ़्ते दो दिनों के अफ़ग़ानिस्तान दौरे पर जाने वाले हैं.

भारत सरकार के आधिकारिक सूत्रों से मिली ख़बरों के मुताबिक़ मनमोहन सिंह अपने साथ अफ़ग़ानिस्तान के लिए लगभग 450 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद का तोहफ़ा भी लेकर जाएंगे.

अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की पाकिस्तान में एक अमरीकी सैन्य अभियान में हुई मौत के बाद मनमोहन सिंह के अफ़ग़ानिस्तान दौरे को काफ़ी अहम माना जा रहा है.

ये तय है कि मनमोहन सिंह की अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से मुलाक़ात के दौरान ओसामा की मौत और उसके बाद के हालात छाए रहेंगे लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौक़े पर भारत ये संदेश देने की कोशिश करेगा कि उसकी नज़र में सबसे महत्वपूर्ण ये है कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति, तरक़्क़ी और स्थायित्व बना रहे.

'बदले हालात'

जानकारों का ये भी कहना है कि बिना पाकिस्तान को बताए हुए अमरीका ने जिस तरह से एक सैनिक अभियान में पाकिस्तान की धरती पर जाकर ओसामा बिन लादेन को मारा है, उससे अमरीका और पाकिस्तान के रिश्तों में काफ़ी कड़वाहट पैदा हो गई है.

इस माहौल में संभावना जताई जा रही है कि काबुल में भारत को और ज़्यादा अहमियत दी जा सकती है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति ने ओसामा की मौत के बाद कहा था कि उनका हमेशा से यही कहना था कि 'आतंकवाद' की असल जड़ पाकिस्तान में है, अफ़ग़ानिस्तान में नहीं और 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ लड़ाई पाकिस्तान में लड़ी जानी चाहिए.

भारत भी हमेशा से यही कहता रहा है कि पाकिस्तान में ऐसे लोगों और संगठनों को पनाह दिया जाता है जो भारत के ख़िलाफ़ चरमपंथी कार्रवाईयों में शामिल रहते हैं.

इस मामले में भारत और अफ़ग़ानिस्तान के नज़रिए में काफ़ी समानता है.

सरकारी अधिकारी के मुताबिक़ सामरिक महत्व के मुद्दों के अलावा भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच आर्थिक संबंधो पर भी बातचीत होगी.

Image caption अफ़ग़ानिस्तान के संसद भवन को भी भारत ने बनवाया है.

मनमोहन सिंह अपनी यात्रा के दौरान अफ़ग़ानिस्तान की संसद को भी संबोधित करेंगे. ग़ौरतलब है कि भारत वहां के संसद भवन का निर्माण कर रहा है.

भारत

भारत ने अब तक अफ़ग़ानिस्तान को 1.3 अरब डॉलर की मदद दी है और सरकार का कहना है कि ये मदद आगे भी जारी रहेगी. अफ़ग़ानिस्तान को आर्थिक मदद देने वाले देशों में भारत का छठा स्थान है.

लेकिन भारत का बहुत साफ़ कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में जारी आर्थिक मदद वहां तैनात अंतरराष्ट्रीय सेना के रहने या जाने पर निर्भर नहीं करता है.

भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में अब तक जो पैसे लगाए हैं उनको चार प्रमुख हिस्सों में बांटा जा सकता है- आधारभूत ढांचे की परियोजना, मानवीय सहायता, सामुदायिक विकास परियोजना और शिक्षा के क्षेत्र में विकास की परियोजना.

सामानों को ईरान की सीमा और उसके आगे चाहबहार बंदरगाह तक ले जाने के लिए भारत ने अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिण-पश्चिम में ज़रांज से डेलाराम तक 218 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई थी जिसका राष्ट्रपति करज़ई और भारत के विदेशमंत्री ने जनवरी 2009 में उद्घाटन किया था.

इसके अलावा हेरात प्रांत में सलमा बांध बिजली परियोजना भी भारत बना रहा है.

मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत रोज़ाना अफ़ग़ानिस्तान के कुल 34 प्रांतों में से 33 प्रांतों के लगभग 20 लाख स्कूली बच्चों को सौ ग्राम उच्च-प्रोटीन वाले बिस्कुट सप्लाई करता है.

अफ़ग़ानिस्तान में भारत का एक बड़ा मेडिकल मिशन भी मौजूद है जो हर महीने लगभग 30 हज़ार अफ़ग़ानी नागरिकों को मुफ़्त चिकित्सा और दवाएं मुहैया कराता है.

Image caption भारत,अफ़ग़ानिस्तान के लाखों स्कूली बच्चों को बिस्कुट मुहैया कराता है.

शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग करते हुए भारत हर साल अफ़ग़ानिस्तान के 675 छात्रों को भारत के शिक्षण संस्थानों में अंडर ग्रेजुएट और स्नातकोत्तर कोर्से के लिए स्कॉलरशीप देता है.

तकनीकी क्षेत्र में भी भारत कई स्कॉलरशीप देता है और भारत के वरिष्ठ अधिकारी अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों को प्रशिक्षण देते हैं.

कृषि के विकास के लिए इस क्षेत्र में शोध करने के लिए भारत हर साल अफ़ग़ानिस्तान के तीन सौ छात्रों को स्कॉलरशीप देता है.

भारत की एक जानी मानी ग़ैर सरकारी संस्था सेवा ने अफ़ग़ान औरतों की ट्रेनिंग के लिए काबुल में एक महिला प्रशिक्षण केंद्र बनाया है.

भारत के प्रयासों से ही अफ़ग़ानिस्तान 2007 में दक्षिण एशिया के संगठन सार्क का सदस्य बन पाया था. सार्क में शामिल होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान व्यापार, परिवहन और ऊर्जा के क्षेत्र में सेंट्रल एशिया और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाला एक अहम केंद्र बन गया है.

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