हिंदुस्तानी होने पर शर्मिदंगी: राहुल

राहुल गांधी (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption इससे पहले भी कई बार राहुल गांधी पुलिस को चकमा देकर कई जगह इसी तरह से जाते रहें हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी बुधवार को अचानक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के तनावग्रस्त भट्टा परसौल गांव में पहुँचे और मायावती सरकार कि भूमि अधिग्रहण नीति के खिलाफ धरने पर बैठ गए.

राहुल गांधी ने किसानों के ख़िलाफ़ गोलीबारी के मामले की न्यायिक जांच की मांग की है और कहा है कि किसानों की मांग जायज़ है. उन्होंने कहा कि जब तक किसानों की मांगे नहीं मानी जाती वो धरने पर ही बैठे रहेंगे.

उनके धरने पर बैठने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि अधिग्रहण का मसला फिर सुर्खियों में आ गया है.

राहुल गांधी उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देकर बुधवार को तडके ग्रेटर नोएडा के तनावग्रस्त भट्टा परसौल गाँव पहुंचे. कुछ देर बाद कांग्रेस महासचिव और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी वहाँ पहुंचे और दोनों नेता किसानों के साथ धरने पर बैठ गए.

कांग्रेस नेताओं के अनुसार पुलिस को चकमा देने के लिए राहुल गांधी ने अपनी गाडी दूर ही छोड़ दी. वह कुछ दूर मोटर साइकिल पर और कुछ दूर पैदल चलकर गाँव पहुंचे.

'दशा देखकर हिंदुस्तानी होने पर शर्मिंदगी होती है'

गाँव वालों ने कम मुआवज़े के बदले जबरन जमीन अधिग्रहण के अलावा पुलिस द्वारा यातनाएँ दिए जाने, घरों और खेतों में आग लगाने और लूटपाट की शिकायत की.

राहुल गांधी ने किसानों से बात करते हुए कहा, "यहाँ जो हुआ है उसे देखकर मुझे अपने हिंदुस्तानी होने पर शर्मिंदगी होती है. यहाँ राज्य सरकरा ने अपने ही लोगों पर अत्याचार किया है. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि जब तक आपकी माँगें मानी नहीं जाती तब मैं आपके साथ हूँ. जब तक आपका काम पूरा नहीं होता तब तक कांग्रेस पार्टी आपके साथ खड़ी रहेगी."

कई महिलाएं तो अपना दर्द सुनाते सुनाते दहाड़ मार कर रो रही थीं. इनके घर वाले गोलीकांड में मारे गए अथवा गायब हैं.

पिछले शनिवार को किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष में पांच लोगों की मौत के बाद से प्रशासन ने धारा 144 के तहत पाबंदी लगा रखी थी.

लेकिन राहुल गाँधी के इस तरह अचानक पहुँच जाने से हैरान प्रशासन ने धारा 144 हटाने की घोषणा कर दी है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने बिना अनुमति धरना प्रदर्शन पर रोक लगा रखी है. उत्तर प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने धरने की अनुमति नही ली थी.

टीकाकारों का कहना है उत्तर प्रदेश सरकार यह तय नही कर पा रही है कि राहुल गांधी के इस गुरिल्ला छाप धरने से वह कैसे निबटे .

स्थानीय सदर तहसील के एक मजिस्ट्रेट राहुल गांधी का ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन धरने पर बैठे लोग मुख्यमंत्री मायावती को बुलाने की मांग कर रहे थे.

इससे पहले पिछले साल अगस्त में भी राहुल गाँधी अलीगढ के टप्पल गाँव का दौरा किया था. टप्पल में भी भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों और पुलिस में संघर्ष हो गया था.

दिग्विजय सिंह

बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को इस तरह भेस बदल कर जाना पड़ा क्योंकि सरकार ने पाबंदी लगा रखी है.

दिग्विजय सिंह ने गोलीकांड की न्यायिक जांच की मांग दोहराई. उन्होंने मुख्यमंत्री मायावती आलोचना करते हुए कहा कि जनता से चुनी हुई सरकार किसानों से बातचीत के बजाय लाठी गोली इस्तेमाल कर रही है.

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को मात्र पांच सौ रूपये प्रति वर्ग मीटर मुआवजा दे रही है और वही जमीन बिल्डर्स , उद्योगपतियों को देने के लिए गुपचुप तीन हजार रूपये प्रति वर्ग मीटर वसूल रही है.

याद दिला दें कि उत्तर प्रदेश सरकार इन आरोपों का खंडन करती है. उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल अथारिटी के लिए किसानों की सहमति से जमीन ले रही है.

मुख्यमंत्री का आरोप है कि विरोधी दल राजनीतिक लाभ के लिए किसानों को भडका रहे हैं.

दिग्विजय सिंह के अनुसार कांग्रेस ने भट्टा परसौल के सिलसिले में पांच सूत्री मांगे रखी हैं.

पहली यह कि गोलीकांड की न्यायिक जांच हो. जेल में बंद किसान रिहा हों. जब तक जांच पूरी न हो किसी को गिरफ्तार न किया जाए. जिन लोगों के घर या खेत जलाए गए हैं उन्हें मुआवजा दिया जाए. बिना सहमति किसानों की जमीन का अधिग्रहण न किया जाए.

अन्य दलों ने नौटंकी बताया

उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने धरने को नौटंकी करार दिया है. उनका कहना है कि राहुल गाँधी खेती किसानी के बारे में कुछ नही जानते.

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने धरने को कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी की मिलीभगत बताया है.

बीजेपी नेताओं ने सवाल किया कि पुलिस ने जब दूसरी पार्टी के नेताओं को वहाँ नही जाने दिया तो राहुल गांधी कैसे पहुँच गए.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहन सिंह ने भी कटाक्ष करते हुए कहा है कि कांग्रेस केन्द्रीय सत्ता में है और उसे धरना देने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए.

शनिवार को हिंसा के बाद से ही सरकार ने राजनीतिक नेताओं और मीडिया के भट्टा परसौल जाने पर रोक लगा रखी थी. इलाके में बड़े पैमाने पर पुलिस तैनात है और छानबीन के बाद ही लोगों को जाने दिया जा रहा था.

लेकिन राहुल गांधी के पहुँचने से सारी पाबंदियां खुल गयीं. बड़ी तादाद में पत्रकार पहुँच गए हैं.

पुलिस के डर से भागे गाँव के पुरुष भी वापस आ रहे हैं.

संबंधित समाचार