स्कूली भवनों को उड़ाने पर यूएन चिंतित

छत्तीसगढ़ में विस्फोट से ध्वस्त हुई इमारत

संयुक्त राष्ट्र महासंघ नें भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में स्कूली भवनों को विस्फोट से उड़ाए जाने पर चिंता व्यक्त की है.

इस वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सशस्त्र संघर्ष में शामिल सभी पात्र 'जान बूझ कर' या तो स्कूलों पर हमला कर रहे हैं या फिर उन्हें बंद होने पर मजबूर कर रहे हैं.

Image caption संयुक्त राष्ट्र ने स्कूली भवनों को विस्फोट से उड़ाए जाने पर चिंता व्यक्त की है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की-मून ने इसपर अपनी चिंता जताते हुए कहा है कि स्कूलों और अस्पतालों पर हमलों की बढ़ती हुई घटनाएं सबके लिए चिंता का विषय है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में बच्चों के अधिकार की सुरक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय कमीशन के हवाले से कहा गया है की माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच चल रहे संघर्ष में बच्चे पिस रहे हैं.

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमीशन के पास ऐसे ठोस आंकड़े मौजूद नहीं हैं जिनसे पता चले कि कितने बच्चे इस संघर्ष से प्रभावित हुए हैं.

सरकार और माओवादियों के तर्क

नक्सलियों द्वारा बच्चों को अपने हथयारबंद दस्तों में शामिल करने की बात पर भी संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की गयी है.

सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच चल रहे संघर्ष में स्कूलों को निशाना बनाए जाने को लेकर बहस छिड़ी हुई है.

माओवादी कहते हैं कि वह स्कूलों को इस लिए निशाना बनाते हैं क्यों कि इसका इस्तेमाल सुरक्षा बलों को ठहराने के लिए किया जाता है. जबकि सरकार की दलील है कि सुदूर जंगल के इलाकों में या यूँ कहा जाए कि माओवादियों के वर्चस्व के इलाकों में स्कूल के अलावा कोई पक्का भवन नहीं है. इसलिए उन इलाकों में सुरक्षा बलों को वहीं रखा जा रहा था.

माओवादियों की दंडकारण्य विशेष जोनल कमिटी के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी का कहना है, "ऑपरेशन ग्रीनहंट के तहत हज़ारों सुरक्षा बलों के जवानों ने झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के सुदूर इलाकों में स्थित स्कूलों में ही डेरा डाल रखा है. यहाँ से वे आम जनता पर ज़ुल्म करते हैं. इस लिए हम इन्हें निशाना बनाते हैं."

मानवाधकार संगठन

इस साल के जनवरी माह में सर्वोच्च न्यायलय नें सरकार को कहा कि वह चार महीनों के अन्दर ही स्कूलों को खाली कर दे. छत्तीसगढ़ की सरकार का कहना है कि वह इस दिशा में काम कर रही है.

वहीं मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राईट्स वाच नें इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़, बिहार और झारखण्ड राज्यों में अलग से शोध किया है. संगठन नें अपनी रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र को भी सौंपी थी. इस शोध में पाया गया कि माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच चल रहे संघर्ष वाले इलाकों में स्कूल ही हिंसा का केंद्र बने हुए हैं.

Image caption छत्तीसगढ़ के एक स्कूल में दोपहर का भोजन करते छात्र

संगठन की भारत की प्रतिनिधि मिनाक्षी गांगूली नें बीबीसी को बताया कि नक्सालियों का दावा है कि वह सिर्फ उन्ही स्कूलों को अपना निशाना बनाते हैं जिनमे सुरक्षा बलों के जवान डेरा जमाते हैं.

मिनाक्षी गांगुली ने कहा, "मगर हमारे शोध में पाया गया कि माओवादी उन स्कूलों को भी निशाना बनाते रहे हैं जिनमे सुरक्षा बल कभी ठहरे ही नहीं थे."

मिनाक्षी का कहना है कि सरकार भी कहती रही है कि वह सुरक्षा बलों को ठहराने के लिए स्कूली भवनों का कम से कम इस्तेमाल करेगी मगर ऐसा नहीं हो रहा है.

संगठन ने माओवादियों और सरकार से अपील भी जारी कि है कि दोनों ही पक्ष स्कूलों को निशाना ना बनाएँ.

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