एंडोसल्फ़ान के उत्पादन पर रोक

  • 13 मई 2011
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Image caption एंडोसल्फ़ान का कपास, चाय की खेती में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कीटनाशक एंडोसल्फ़ान पर दिए अपने अंतरिम आदेश में उसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है.

मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान लोगों के जीवन को अहम बताते हुए कहा,"संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार) के तहत जो भी फै़सले दिए गए है उन सभी को सैद्धांतिक तौर पर ध्यान में रखते हुए एंडोसल्फ़ान के उत्पादन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाई जा रही है."

इसके साथ-साथ खंडपीठ ने वैधानिक संस्थाओं को निर्देश दिया कि वो अगले आदेश तक उत्पादकों को दिए गए लाइसेंस फ्रीज़ कर दें.

इस फै़सले पर खुशी ज़ाहिर करते हुए एंडोसल्फ़ान से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए काम कर रहे सरकारी अधिकारी और डॉक्टर मोहम्मद आशिल का कहना था कि ये फैसला मील का पत्थर है.

खुशी

मोहम्मद आशिल का कहना है, ''स्टॉकहोम सम्मेलन में ये फ़ैसला किया गया था कि एंडोसल्फ़ान की बिक्री, उत्पादन और इस्तेमाल को पांच सालों के भीतर धीरे-धीरे हटाया जाएगा. पूरा विश्व ये मानता है कि ये कीटनाशक घातक है ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत अहमियत रखता है.

उन्होंने कहा,". ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का ये फै़सला बड़ी जीत है."

इसी साल अप्रैल महीने में स्टॉकहोम सम्मेलन में 100 से ज़्यादा देशों ने एंडोसल्फ़ान के उत्पादन और इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया था.

एंडोसल्फ़ान पर 81 देशों ने प्रतिबंध लगाया हुआ है.

भारत एंडोसल्फ़ान के बड़े उत्पादक देशों में से है. कपास और चाय की खेती में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.

सीपीआई-एम की युवा इकाई डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया यानि डीवाईएफ़आई ने देश भर में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए याचिका दायर की थी.

डीवाईएफ़आई ने अपनी याचिका में कहा था कि एंड़ोसल्फ़ान के इस्तेमाल से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है.

मोहम्मद आशिल का कहना है कि केरल के कासरगोड़ ज़िले में साल 1978 से 2000 के बीच एंडोसल्फ़ान का हवाई छिड़काव किया गया था. लेकिन जब इंडियन काउंसिल फ़ॉर मेडिकल रिसर्च यानि आईसीएमआर ने इस कीटनाशक से होने वाले दुष्प्रभाव का अध्ययन किया तो पाया कि इससे लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.

घातक

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Image caption कपास की खेती में इस्तेमाल

मोहम्मद आशिल का कहना है,'' कासरगोड़ ज़िले के जिन इलाक़ों में इस कीटनाशक का छिड़काव किया गया वहां मानसिक बीमारियां, विक्षिप्तताएं और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा हो रही थीं.''

साल 2003 में हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में एंडोसल्फ़ान पर रोक लगा दी थी.

साल 2006 में केंद्र सरकार के एक दस्तावेज़ में भी कहा गया था कि एंडोसल्फ़ान के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जानी चाहिए.

इसी बीच शुक्रवार को अदालत ने आदेश दिया है कि एंडोसल्फ़ान से लोगों और पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभाव का दो अलग-अलग समितियों द्वारा विस्तृत अध्ययन किए जाना चाहिए.

इन दोनों कमेटियों की अध्यक्षता आइसीएमआर के महानिदेशक और कृषि आयुक्त करेंगे.

इन समितियों को आठ हफ़्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच का कहना था कि कमेटी की रिपोर्ट ये बताएगी कि कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए या नहीं.

या फिर अभी तक जिस मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है उसे चरणबद्ध तरीक़े से हटाया जाए और ये भी देखा जाए कि इसके अलावा अन्य क्या विकल्प मौजूद हैं.

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