बिहार में अगवा मतदानकर्मी रिहा हुए

  • 17 मई 2011
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Image caption माओवादियों ने चुनाव के दौरान बहिष्कार का भी आह्वान किया था

बिहार के जमुई ज़िले में माओवादियों ने गत रविवार जिन सात सरकारी कर्मचारियों को अगवा कर लिया था, उन्हें मंगलवार दोपहर इसी ज़िले के एक जंगली इलाक़े में छोड़ दिया गया.

राज्य में हो रहे पंचायती-निकाय चुनाव से संबंधित मतदान कराने के लिए जब ये कर्मचारी जमुई ज़िले के सोनो प्रखंड से गुज़र रहे थे, तो उसी समय उनका वाहन बारूदी सुरंग धमाके की लपेट में आ गया.

धमाके में वाहन चालक की मौत हो गई और एक अन्य को गंभीर चोटें आईं. लेकिन जो सात मतदानकर्मी बच गए, उन्हें वहाँ घात लगाकर बैठे माओवादियों ने अपने क़ब्ज़े में ले लिया. फिर माओवादियों की तरफ़ से कथित तौर पर ये शर्त रखी गई कि गिरफ़्तार उनके दो साथियों को छोड़े जाने के बाद ही सातों मतदानकर्मियों को मुक्त किया जाएगा.

चर्चा है कि शर्त मान लिए जाने के बाद इन मतदानकर्मियों को माओवादियों ने रिहा किया है, जबकि पुलिस ने ऐसी किसी शर्त के माने जाने का खंडन किया है.

स्थगित

जमुई के पुलिस अधीक्षक राम नारायण सिंह ने बीबीसी को टेलीफ़ोन पर बताया कि माओवादियों की ओर से दिए गए नाम-पता का कोई व्यक्ति पुलिस गिरफ़्त में था ही नहीं कि उसे छोड़ा जाता.

उन्होंने कहा, ''लगता है ग़लत सूचना के आधार पर माओवादियों ने शर्त रख दी थी, लेकिन सच्चाई ये है कि अगवा किए गए मतदानकर्मियों की तलाश में जब पुलिस ने उस पूरे इलाक़े में दबिश बढ़ा दी और नक्सलियों को तीन तरफ़ से घेर लिया गया, तब बाध्य होकर उन सातो कर्मियों को छोड़ा गया.''

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि खैरा और सोनो प्रखंड के सीमावर्ती जंगल-पहाडी क्षेत्र से इन मतदानकर्मियों को सुरक्षित जमुई ले आया गया है.

इस घटना के कारण संबंधित पंचायतों के चुनाव संबंधी मतदान को फ़िलहाल स्थगित कर दिया गया है. राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था पुख़्ता कर लेने के बाद ही वहाँ मतदान कराया जाएगा.

जमुई ज़िले में मतदान के पहले चरण के दौरान भी एक माओवादी हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी.

राज्य के अन्य नक्सल प्रभावित इलाक़ों में इस तरह के हमले चुनाव के दौरान होते रहे हैं, क्योंकि चुनाव बहिष्कार के अपने ऐलान को कारगर बनाने के लिए यहाँ का माओवादी संगठन काफ़ी सक्रिय हो जाता है.

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