‘भट्टा-परसौल पर रिपोर्ट दे माया सरकार’

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Image caption भट्टा परसौल में हिंसा के बाद राजनीती तेज़ हुई है

उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने ग्रेटर नोएडा के भट्टा परसौल ग्रामों में पिछले दिनों हुए कथित पुलिस अत्याचार की ख़बरों का खु़द से संज्ञान लेते हुए मायावती सरकार से जवाब तलब किया है.

आयोग सूत्रों के अनुसार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एचके सेमा ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से कहा है कि वह मीडिया में छपी ख़बरों में लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच कर 24 जून तक रिपोर्ट पेश करें.

आयोग इस मामले पर पांच जुलाई को होने वाली अपनी बैठक में इस रिपोर्ट पर विचार करेगा.

जस्टिस सेमा ने अख़बारों में छपी ख़बरों का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि भट्टा परसौल में हाल ही में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर किसानों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में किसानों का उत्पीड़न हुआ और लोग मारे गए.

आदेश में उन आरोपों का जि़क्र है कि वहाँ राख के 74 ढेर मिले जिनमे लाशें हैं. साथ ही महिलाओं को पीटने और बलात्कार के आरोप लगे हैं.

आदेश में लोगों के पीटे जाने और उनके घर नष्ट किए जाने की घटनाओं का भी ज़िक्र मिलता है.

आरोप

हालांकि अखबारों में ये आरोप कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के हवाले से छपे हैं, लेकिन जस्टिस सेमा के आदेश में राहुल गांधी का जिक्र नही है.

जस्टिस सेमा ने अपने आदेश में कहा है कि अगर ये आरोप सही हैं तो यह मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.

गौ़रतलब है कि विपक्षी दल भट्टा परसौल कांड की स्वतंत्र सीबीआई और न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं.

जबकि राज्य मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन गृह विभाग और पुलिस से ही रिपोर्ट मांगी है.

इसलिए ऐसा नही लगता कि जस्टिस सेमा के इस कदम से विपक्ष संतुष्ट होगा.

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