आज़ाद भारत में पहली बार ग़रीबों की जाति आधारित जनगणना

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Image caption भारत में 1931 के बाद ये पहली जाति आधारित जनगणना होगी

भारत के केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को पूरी आबादी के आर्थिक और जाति आधारित जनगणना सर्वेक्षण की अनुमति दे दी है.

भारत में साल 1931 के बाद की जाने वाली ये पहली जाति आधारित जनगणना होगी. गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों और जाति आधारित जनगणना के सर्वेक्षण का काम साथ-साथ होगा.

भारत में अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वालों की गणना होती रही है लेकिन शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए ये सर्वेक्षण पहली बार होगा.

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि ग़रीबी और जाति आधारित सर्वेक्षणों के बाद भिन्न-भिन्न मंत्रालय को अपनी नीतियाँ बनाने में मदद मिलेगी.

दिल्ली में अंबिका सोनी ने एक पत्रकार वार्ता में कहा, "संसद में बहस के दौरान भिन्न पार्टियों के अध्यक्षों ने विभिन्न जातियों की सामाजिक आर्थिक हालत के बारे में जानकारी जुटाने को कहा था. इस सर्वेक्षण में इसी दिशा में भिन्न मंत्रालय मिल कर काम कर करगें और जमा जानकारी को ज़रूरतमंद विभागों को नीति निर्धारण के लिए दिया जाएगा."

'गोपनीयता रखी जायेगी'

सोनी ने बताया कि सर्वेक्षण का काम जून से शुरु किया जाना है. इस काम को कई चरणों पूरे भारत में किया जाएगा और दिसंबर तक इसे ख़त्म करने का लक्ष्य रखा गया है.

ग्रामीण विकास विभाग में संयुक्त सचिव संजय कुमार राकेश ने इस मौक़े पर ग़रीबी रेखा के सर्वेक्षण के बारे में कहा कि पूरी आबादी को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा. उन्होंने कहा,"पहला हिस्सा वो होगा जो अपने आप ग़रीबी रेखा के बाहर हो जाएगा. दूसरा वो होगा जो अपने आप बीपीएल (यानी ग़रीबी रेख के नीचे) आबादी में शामिल हो जाएगा और तीसरा हिस्सा वो होगा जो ग़रीबी के भिन्न मापदंडों पर आंका जाएगा."

सोनी ने बताया कि इस काम को राज्य सरकारों के कर्मचारी करेगें और जाति और धर्म संबंधी जानकारी को सार्जनिक नहीं किया जाएगा. भारत का सांख्यिकी विभाग समग्र संकलित आकंड़ों को जारी करेगा.

भारत में पहली बार इस सर्वेक्षण में कागज़ कलम का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और सर्वेक्षणकर्ता एक इलेक्ट्रौनिक पैड के ज़रिए सभी जानकारियां भरेगें.

अन्य निर्णय

इसके आलावा केंद्र सरकार ने पानी संकट से बदहाल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले बुंदेलखंड अंचल के लिए 200 करोड़ रुपयों की एक योजना को भी मंज़ूरी दे दी है.

एक अन्य निर्णय के बारे में जानकरी देते हुए सोनी ने कहा कि भारत सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड से विनिवेश करने का भी निर्णय लिया है.

भारत सरकार ने इस उपक्रम में अपनी 95 प्रतिशत भागीदारी को बेचने का निर्णय लिया है. शेष पांच प्रतिशत शेयर बैंकों के पास ही रहेंगें.

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