जयललिता से हाई कोर्ट का सवाल

  • 19 मई 2011
तमिलनाडु सचिवालय
Image caption जयललिता ने नई इमारत में विधानसभा के भीतर कभी कभी कदम नहीं रखा

चेन्नई हाई कोर्ट ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता से पूछा है कि वे क्यों राज्य विधानसभा और सचिवालय की नई नवेली इमारत को छोड़ कर एक पुरानी इमारत में सब सरकारी काम ले जाने पर आमादा हैं.

हाई कोर्ट ने ये नोटिस एक जनहित याचिका पर जारी किया है. इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होनी है.

याचिकाकर्ता जी कृष्णमूर्ती ने कहा है कि राज्य की पिछली दम्रुक सरकार ने क़रीब 1000 करोड़ रुपयों की लागत से एक इमारत बनवाई थी जिसमे राज्य की विधानसभा और सचिवालय दोनों चले गए थे. उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि उन्हें मीडिया में आ रही ख़बरों से पता चला है कि राज्य की नई मुख्यमंत्री जयललिता नई इमारत में ना जाने पर अड़ी हुई हैं. वे विधानसभा और सचिवालय को वापस उठा कर इनके पुराने ठिकाने फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज ले जाना चाहती हैं.

याचिकाकर्ता का दावा है कि सरकार के इस निर्णय का कारण महज़ जयललिता की निजी पसंद है.

जयललिता-करूणानिधि विवाद

दरअसल फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज से विधानसभा और सचिवालय हटाने का निर्णय सबसे पहले जयललिता ने अपने पिछले मुख्यमंत्रित्व काल में लिया था.

Image caption करूणानिधि सरकार ने पुरानी विधान सभा की इमारत को लाईब्रेरी में तब्दील कर दिया था

निर्णय पर वो कुछ क़दम उठा पाती, उसके पहले वो 2006 के चुनावों में सत्ता से बाहर हो गईं और मुख्यमंत्री बने करूणानिधि ने जयललिता की पसंद की हुई जगह पर एक लाइब्रेरी बना दी और सचिवालय किसी अन्य जगह पर बनवा दिया. जब जयललिता ने विरोध किया तो करूणानिधि ने कामकाज को फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज से आनन-फानन में नई इमारत में स्थानांतरित करवा दिया और फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज को भी एक लाइब्रेरी में तब्दील कर दिया.

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जयललिता इससे चिढ गईं.

चुनाव परिणामों में उनकी वापसी के कुछ ही घंटों के भीतर प्रशासन ने सरकारी कामकाज को वापस फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज में ले जाना शुरू कर दिया.

जयललिता के अनुसार उनका मंत्रिमंडल जल्द ही इस बात पर विचार करेगा. लेकिन इस पर किसी को शक नहीं कि होगा वही जो वो चाहेगीं.

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