बॉलीवुड में विदेशी बालाओं की धूम

  • 20 मई 2011
Image caption कैटरीना मानती हैं कि बाहर के लोगों के आने से ही बॉलीवुड का बाज़ार बढ़ेगा.

बॉलीवुड गानों में कितनी ही विदेशी लड़कियाँ नाचती या फिर छोटे रोल निभाती नज़र आती हैं, लेकिन कौन हैं ये लड़कियां और कैसा रहा है उनका सफ़र सपनों की इस नगरी में.

ब्राज़ील की रहने वाली जिज़ेल मोंटेरो सातवें आसमान पर हैं.

सैफ़ अली खान जैसे बड़े सितारे के साथ अपनी पहली फ़िल्म ‘लव आजकल’ के साथ अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत करने वाली जिज़ेल शाहुरुख खान के बैनर ‘रेड चिलीज़’ की फ़िल्म ‘ऑलवेज़ कभी-कभी’ में मुख्य भूमिका में हैं.

वो कटरीना कैफ़ की तरह उन चंद विदेशी लड़कियों में से हैं जिन्होंने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई है.

मुंबई के अंधेरी पश्चिम के एक शानदार दफ़्तर में हमारी उनसे मुलाकात हुई. साथ में सह-कलाकार अली फ़ज़ल भी बैठे थे. वो हंसते हुए कहती हैं कि उनकी सफ़लता का मुख्य कारण उनका भारतीय लगना है.

वो कहती हैं, ''मैं मॉडलिंग के लिए ही भारत आई थी क्योंकि लोग मुझे कहते थे, कि मैं भारतीय दिखती हूँ. मैं भारत यही पता करने आई थी कि आखिर इस बात का क्या मतलब है.''

'सातवें आसमान पर'

लेकिन क्या है ये भारतीय जैसा दिखना? इसके जवाब में जिज़ेल अपनी आँखों की ओर इशारा करती हैं और कहती हैं, ‘’ मेरे भारतीय जैसे दिखने का ताल्लुक मेरी आँखों से है. यहाँ तक की मेरे पिता भी कहते हैं कि मैं भारतीय दिखती हूँ.’’

ज़िज़ेल ने मॉडलिंग के लिए अपनी विदेश यात्राओं के दौरान बॉलीवुड के बारे में सुना. वो हिंदी सीख रही हैं और कहती हैं कि वो लंबे समय के लिए इस उद्योग में आई हैं. हालांकि उन्होंने मुंबई में अभी घर नहीं खरीदा है.

उनके लिए सफ़लता का एक और कारण है, सही व्यक्ति का सही जगह पर होना और सही अवसर मिलना.

जर्मनी की रहने वाली 26 वर्षीया जूलिया एलिज़ाबेथ भारतीय नहीं दिखतीं, लेकिन बॉलीवुड में उनका सफ़र दूसरी तरह का रहा है.

जर्मनी में वो थिएटर कलाकार थीं, वहाँ उन्होंने कई बॉलीवुड फ़िल्में देखीं. पिछले नवंबर में उन्हें भारत आने का मौका मिला तो वो झट से तैयार हो गईं.

पहले चंडीगढ़ में उन्होंने कुछ बस्तियों के बच्चों के साथ काम किया. कुछ डांस वर्कशॉप्स भी कीं, लेकिन उनका दिल मुंबई आने को इतना किया कि वो सब कुछ छोड़कर मुंबई आ गईं.

जूलिया कहती हैं कि बॉलीवुड फ़िल्में किसी नाट्य मंच जैसी हैं. उन्होंने कहा, ''मुझे फ़िल्मों की वेशभूषा, फ़िल्म संगीत बेहद पसंद है. इनमें ओवरऐक्टिंग भी होती है.''

'ऐक्टिंग पहली पसंद'

शाहरुख की आनेवाली सुपरहीरो फ़िल्म रा-वन में भी जूलिया को काम करने का मौका मिला.

उन्हें मुंबई का पागलपन पसंद है. मुंबई में काम करने का मिज़ाज अलग है, क्योंकि आखिरी वक्त पर यहाँ कोई भी कार्यक्रम रद्द हो जाता है.

वो कहते हैं, ''जर्मनी बेहद व्यवस्थित है और भारत में बहुत गंदगी है, लेकिन फिर भी मुझे भारत बेहद पसंद है.''

जूलिया ने काम की शुरुआत पाँच सौ रुपए से एक एक्स्ट्रा कलाकर के तौर पर की.

उन्हें पता था कि मुंबई के कोलाबा में कई लोग मिल जाते हैं जिन्हें फ़िल्मों के लिए लड़कियों की तलाश रहती है.

चाहे फ़िल्में में अभिनय हो, विज्ञापनों में काम हो, या फिर शादी में मेहमानों का स्वागत हो, उन्हें मुंबई जैसे महंगे शहर में गुज़ारे के लिए सब कुछ करना पड़ता है. लेकिन ऐक्टिंग उनकी पहली पसंद है और उन्हें उम्मीद है कि वो बॉलीवुड में अपनी मंज़िल ज़रूर हासिल करेंगी.

पहले उन्हें किसी सीन में सिर्फ़ खड़ा कर दिया जाता था, लेकिन अब जब वो थोड़ी हिंदी बोल लेती हैं तो उन्हें कुछ लाइनें कहने का भी मौका मिल जाता है.

तो कैसे होते हैं ये फ़िल्म स्टार्स? इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं, ‘दीपिका पादुकोण में बहुत ऐटीट्यूड है लेकिन प्रियंका चोपड़ा बहुत अच्छी हैं.’

उधर अमरीका के ऐरिज़ोना इलाके की रहने वाली कैटरीना लोपेज़ कुछ हफ़्तों पहले फ़िल्म ‘भिंडी बाज़ार’ में एक आईटम नंबर के लिए भारत आई थीं.

‘कल्चर शॉक’

कैटरीना ने बॉलीवुड के बारे में सुन रखा था, उन्होंने हिंदी फ़िल्में देखीं थीं और गाने सुने थे.

‘मुझे लगा कि ये एक रोचक बाज़ार है क्योंकि यहाँ फ़िल्मों में ही गाने होते हैं. ये मुझे बहुत अच्छा लगा. इसमें बहुत मज़ा आया. मुझमें इसे लेकर आकर्षण पैदा हुआ.’ लेकिन मुंबई आना उनके लिए ‘कल्चर शॉक’ था.

हिंदुस्तानी मसालेदार खाने से परेशान कैटरीना कहती हैं कि भारत में लोग बहुत तेज़ी से शूटिंग करते हैं. गाना सीखने के लिए मात्र दो दिन दिए जाते हैं.

इतनी तेज़ी से गाना सीखना उनके लिए मुश्किल था. गाने को फ़िल्माते वक्त होंठों को हिलाते वक्त भी ध्यान रखना पड़ता था.

उनका काम सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक चलता था.

उनका कहना है, ''मैं बॉलीवुड में लंबा करियर बनाना चाहूँगी. ऐसा नहीं है कि मैं एक गाना करूँगी और चली जाऊंगी. मैं हमेशा के मुंबई आने का सोच रही हूँ. लेकिन पहले मुझे भाषा सीखनी होगी.''

लेकिन इन सभी लड़कियों की एक ही शिकायत है. हिंदुस्तानी मर्दों से. जूलिया कहती हैं कि उन्हें कई शादी के प्रस्ताव मिल चुके हैं और कई मर्द समझते हैं कि उन्हें हासिल करना आसान है.

कैटरीन भी बताती हैं कि लोग उन्हें कुछ अजीब ही नज़रों से देखते थे, जिससे उन्हें असुविधा होती थी.

कई आक्षेप भी

लेकिन मुंबई में विदेशियों के काम करने को लेकर कई आक्षेप लगे हैं.

Image caption जूलिया कहती हैं कि बॉलीवुड फ़िल्में किसी नाट्य मंच जैसी हैं.

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की फ़िल्म शाखा ‘चित्रपट कर्मचारी सेना’ की महासचिव शालिनी ठाकरे कहती हैं कि बड़ी संख्या में विदेशी लड़कियाँ टूरिस्ट वीज़ा के बहाने भारत में आकर फ़िल्मों में काम कर रही हैं और इससे स्थानीय लोगों के रोज़गार पर असर पड़ेगा.

हालांकि कैटरीना कहती हैं कि ऐसी सोच गलत है. वो कहती हैं कि उनके जैसे लोग हिंदी फ़िल्म की संस्कृति को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं.

कैटरीना मानती हैं कि बाहर के लोगों के आने से ही बॉलीवुड का बाज़ार बढ़ेगा और जो लोग बाहरी सभ्यता के हमले या फिर बाहरी लोगों के यहाँ आकर काम हथियाने की बात करते हैं, वो सही नहीं है.

कई विदेशी लड़कियों के बारे में ऐसे भी आरोप लगे हैं ये लड़कियाँ फ़िल्मों के बहाने दरअसल जिस्मफ़रोशी से जुड़ी हैं.

हमने जूनियर आर्टिस्ट्स मुहैया करवाने वाले कुछ लोगों से बात की तो उन्होंने इस बात को स्वीकारा.

जूलिया इससे इंकार नहीं करतीं, लेकिन उनके मुताबिक कई रूसी गणराज्यों की लड़कियाँ जिस्मफ़िरोशी से जुड़ी होती हैं और इससे सभी विदेशी लड़कियों की बदनामी होती है.

उधर विश्लेशक कहते हैं कि ब़ॉलीवुड फ़िल्मों ने अपने दरवाज़े विदेशी लड़कियों के लिए भले ही खोले हों, लेकिन ये राह आसान नहीं है. इस बाज़ार में कौन सा सिक्का चल जाए, कुछ पता नहीं.

मशहूर नृत्य निर्देशक जोड़ी बॉस्को कहते हैं, '' बॉलीवुड में अब कई तरह की फ़िल्में बनती हैं. गानों में दिखने वाली कई लड़कियाँ शायद छह महीने के कांट्रैक्ट पर होती हैं और वो बॉलीवुड को खोजना चाहती हैं. बहुत कुछ आपकी किस्मत पर भी निर्भर होता है.''

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