'देश में महंगाई जारी रहेगी'

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Image caption वित्त मंत्री पर महंगाई को क़ाबू में रखने के साथ-साथ विकास दर की गति बनाए रखने का भी दबाव है.

भारतीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि देश में महंगाई का दौर जारी रहेगा.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि विश्व बाज़ार में ज़रूरत की चीज़ों की क़ीमतें ऊँचे स्तर पर हैं जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा.

मुंबई में एक समारोह में पत्रकारों से बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "हमें बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमतों पर दबाव बना रहेगा क्योंकि कुछ अनाज की पैदावार कम होने से बाज़ार में उसकी कमी है."

वित्त मंत्री का बयान संयु्क्त प्रगतिशील गठबंधन की मनमोहन सिंह सरकार के दो साल पूरे होने के ठीक एक दिन पहले आया है.

भ्रष्टाचार के साथ-साथ महंगाई ख़ासतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों को लेकर सरकार की कड़ी निंदा होती रही है.

ब्याज दर

महंगाई को क़ाबू में करने के लिए रिज़र्व बैंक ने कई मौद्रिक क़दम जैसे ब्याज दर बढ़ाने जैसे उपाय किए हैं लेकिन इनका कोई बहुत ज़्यादा असर अभी तक देखने में नहीं आया है.

देश में मार्च 2010 से अब तक ब्याज दर में नौ बार बढ़ोत्तरी की जा चुकी है.

देश के मुख्य सांख्यिकी अधिकारी टीसीए अनंत ने कहा है कि अगर मानसून ठीक रहता है तो मंहगाई की दर आठ फ़ीसदी से कम रहेगी.

रिर्ज़व बैंक ने कहा है कि साल के अंत तक ये छह प्रतिशत के आसपास होगा.

लेकिन हाल के सालों में मुद्रास्फीति पर सबसे ज़्यादा असर खाने-पीने की चीज़ों की बढ़ी क़ीमतों की वजह से हुआ है.

वार्षिक आधार पर निकाले जानेवाले आंकड़ों के मुताबिक खाने-पीन की वस्तुओं की क़ीमतों में पिछले चंद सालों में बढ़ोतरी दहाई अंकों में हुई है. हालांकि हाल के आंकड़ों के अनुसार ये 7.47 फ़ीसदी पर थी.

शनिवार को दिए गए बयान में भी वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में खाद्यान्न की कमी की बात कही है, जिसका साफ़ मतलब ये है खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में वृद्धि.

'पेट्रोल पर बढ़ोतरी वापस नहीं'

प्रणव मुखर्जी ने कहा, "जब विश्व बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल हो, खासकर ऐसे उत्पादों के मामले में जिनको लेकर हम आयात पर निर्भर करते हैं, तो इसका असर पड़ना स्वाभाविक है."

Image caption महंगाई को लेकर विपक्षी दलों और मज़दूर संघों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं.

फिर भी उन्होंने कहा कि चंद दिनों पहले बढ़ाई गई पेट्रोल की क़ीमतें वापस नहीं ली जाएंगी.

उन्होंने कहा कि इसका कोई सवाल नहीं उठता क्योंकि सरकार पहले से ही डीज़ल पर 16 रूपये प्रति लीटर, कैरोसीन पर 26 रूपये और रसोई गैस पर 320 रूपयों की सब्सिडी वहन कर रही है.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों पर दी जानेवाली सब्सिडी की वजह से पिछले साल सरकार पर एक लाख करोड़ रूपयों का आर्थिक बोझ पड़ा था.

भारतीय वित्त मंत्री ने माना कि बढ़ी हुई महंगाई का असर देश की आर्थिक तरक्क़ी पर भी पड़ेगा.

भारत के वार्षिक वित्तीय बजट में प्रणव मुखर्जी ने इसके लिए नौ प्रतिशत का लक्ष्य रखा था.

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