परियोजनाओं से हाथ खींचना शुरू

  • 26 मई 2011
किसान आंदोलन इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption नोएडा विवाद के बाद उत्तर प्रदेश सरकार भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर चौकस हो गई है.

नोएडा के आस पास ज़मीन अधिग्रहण को लेकर किसानों के उग्र आन्दोलन को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की विवादास्पद मैत्रेय परियोजना और भटनी हथुआ रेल लाइन परियोजनाओं से हाथ खींचना शुरू कर दिया हैं.

देवरिया के जिला मजिस्ट्रेट जुहैर बिन सगीर ने फोन पर बातचीत में बताया कि, ''भटनी - हथुआ नई रेल बिछाने के विरोध में स्थानीय किसान 100 दिनों से आंदोलन कर रहे थे. इनमे से ज़्यादातर छोटे किसान हैं. इन किसानों की समस्याओं और उनके असंतोष से शासन को अवगत करा दिया गया है.''

जिला मजिस्ट्रेट सगीर का कहना कि अब आगे की कार्रवाही के लिए शासन के निर्देश का इंतज़ार है.

जिला मजिस्ट्रेट ने उत्तर प्रदेश सरकार को लिखे गए पत्र की प्रतिलिपि भूमि बचाओ किसान संघर्ष समिति को भी दी है.

धरना स्थगित

संघर्ष समिति के अध्यक्ष त्रिगुणानन्द मिश्र ने बताया कि जिलाधिकारी के पत्र पर विचार करने के बाद पिछले सौ दिनों से चल रहा धरना पन्द्रह दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है.

त्रिगुणानंद मिश्र का कहना है कि अगर अगले पन्द्रह दिनों में उत्तर प्रदेश सरकार ने भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही निरस्त नही की तो फिर दोबारा और जोर से आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा.

भटनी कस्बा बरौनी-लखनऊ मुख्य रेल लाइन पर है. सन 2005 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने बिहार के गोपालगंज जिले में अपने गाँव फुलवरिया, ससुराल बथुआ बहिन के गाँव पंचदेवरी आदि को मुख्य रेल लाइन से जोड़ने के लिए भटनी - हथुआ के बीच लगभग 74 किलोमीटर रेल लाइन के लिए 200 करोड़ की परियोजना स्वीकृत की थी. इसमें से लगभग 12 किलोमीटर प्रस्तावित रेल लाइन उत्तर प्रदेश में है.

लालू यादव की योजना

लालू यादव के सत्ता में रहते बिहार के फुलवरिया तक तो रेल लाइन बिछाने का काम हुआलेकिन उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का काम रुका हुआ है, हालांकि पूर्वोत्तर रेलवे ने ज़मीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन के पास एक बड़ी धनराशि जमा कर दी है.

इस परियोजना से भटनी के आसपास 14 गाँवों के लगभग एक हजार किसान प्रभावित हो रहे हैं. संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्री मिश्र का कहना है कि यह रेल लाइन गैर जरुरी है और रेल प्रशासन ने केवल लालू यादव को खुश करने के लिए प्रस्तावित की थी.

श्री मिश्र के मुताबिक़ अगर उस पार फुलवरिया और हथुआ बथुआ कोई बड़े पर्यटक केन्द्र होते या वहाँ कोई कल कारखाना होते जिसे यहाँ के लोगों को रोजगार मिलता तब बात दूसरी होती.

समझा जाता है कि इस परियोजना में मुख्यमंत्री मायावती की कोई निजी दिलचस्पी नही है. इसीलिए जिला प्रशासन ने इसके बारे में पुनर्विचार की सिफारिश की है.

मैत्रेय परियोजना

इसी तरह पड़ोस के बौद्ध तीर्थ कुशीनगर में विवादास्पद मैत्रेय परियोजना पर भी शासन स्तर पर पुनर्विचार की खबरें हैं.

कुशीनगर में मैत्रेय बुद्ध की पांच सौ फुट ऊंची प्रतिमा लगाने और आसपास अस्पताल, विश्वविद्यालय आदि बनाने की ये परियोजना सन 2001 में भाजपा के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू करायी थी.

इस परियोजना का संचालन बौद्ध धर्मावलंबियों की संस्था मैत्रेय ट्रस्ट करती है.

बाद में समाजवादी पार्टी की मुलायम सिंह यादव सरकार ने परियोजना के लिए आठ सौ एकड़ जमीन के अधिग्रणह की अधिसूचना जारी की . लेकिन यहाँ के किसान जून 2007 यानि चार सालों से जमीन अधिग्रहण के विरोध में धरना दे रहे हैं.

मालूम हुआ है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार में संस्कृति विभाग की प्रमुख सचिव स्तुति कक्कड ने कुशीनगर का दौरा करके जिला अधिकारियों और कुछ किसानों से इस प्रस्ताव पर विचार किया कि लगभग पांच सौ एकड़ जमीन किसानों को वापस करके केवल तीन सौ एकड़ का अधिग्रहण किया जाए.

किसानों के आंदोलन को देखते हुए ये भी प्रस्ताव है कि मैत्रेय परियोजना से प्रभावित किसानों को भी उसी दर से मुआवजा दिया जाए, जिस दर से प्रस्तावित इंटरनेशनल हवाई अड्डे से प्रभावित किसानों को दिया जा रहा है. यह दर 945 रूपये प्रति वर्ग मीटर है.

जिलाधिकारी ज्ञान सिंह का कहना है कि इस मसले पर कई बैठकें हो चुकी हैं और अब निर्णय लखनऊ में शासन स्तर पर होना है.

मैत्रेय ट्रस्ट के कानूनी सलाहकार अतुल वीर चोपडा का कहना कि ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने 300 एकड़ में परियोजना संचालित करने के लिए अपनी सहमति दे दी है ताकि काम जल्दी शुरू किया जा सके. अब निर्णय सरकार को करना है.

हवाई अड्डा

इंटरनेशनल हवाई अड्डा मुख्यमंत्री मायावती और उनके कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह की प्रिय परियोजना है. इसीलिए कई महीने पहले सरकार ने इस परियोजना का मुआवजा बढ़ाकर 945 रूपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया था, जो नोएडा से भी अधिक है.

हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण की बाधा दूर होने के बाद अब मायावती सरकार चाहती है कि मैत्रेय परियोजना कम भूमि में ही सही लग जाए जिससे विदेशों से बौद्ध टूरिस्ट आयें.

लेकिन संघर्ष कर रहे किसानों के नेता गोवर्धन गौड़ का कहना है कि शासन ने उन्हें अभी कोई सूचना नही दी है. गोवर्धन गौड़ इस बात पर अड़े हैं कि पहले अधिग्रहण की पुरानी अधिसूचना निरस्त की जाए. उसके बाद राज्य सरकार किसानों से बात करके नए सिरे से सारी प्रक्रिया शुरू करे.

हाल ही में लखनऊ में सरकार की एक उच्चस्तरीय बैठक में ये रणनीति बनी है कि जहां-जहां भी भूमि अधिग्रहण की कार्रवाही चल रही है, उन सबकी समीक्षा करली जाए और जहां तक संभव हो चुनाव से पहले किसानों से टकराव टाला जाए.

संबंधित समाचार