बलूचिस्तान में आतंक को भारतीय मदद नहीं: अमरीका

भारत-पाकिस्तान के झंडे
Image caption अमरीका ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर काफ़ी देर बाद अपनी राय व्यक्त की है

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हो रही वारदातों और पिछले कुछ वर्षों में इस मामले पर भारत-पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अमरीका ने कहा है भारत बलूचिस्तान में किसी आतंकवादी या अलगाववादी संघर्ष के लिए वित्तीय मदद नहीं दे रहा है.

अमरीकी सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने हाल में कहा है कि बलूचिस्तान में जो हो रहा है वह पाकिस्तान की अंदरूनी परिस्थितियों का नतीजा है.

ग़ौरतलब है कि जुलाई 2009 में शर्म अल-शेख़ में भारत-पाकिस्तान बातचीत के बाद जारी किए गए संयुक्त बयान में पहली बार बलूचिस्तान का ज़िक्र आया था.

उसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भारत लौटने पर विपक्ष ने इस मुद्दे आपत्ति जताई थी. भारत में विपक्ष का कहना था कि संयुक्त बयान में बलूचिस्तान का ज़िक्र आने से पहली बार पाकिस्तान को ये मौक़ा मिल रहा है वह भारत की ओर से उस पर चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोपों पर पलटवार कर सके.

इस विषय पर भारत और पाकिस्तान का द्वंद्व होता रहा है और भारत बलूचिस्तान में सरकार विरोधी संगठनों और तत्वों को किसी तरह की मदद देने के आरोपों का खंडन करता रहा है.

'चीन की सैन्य तैनाती पर भारत, अमरीका की नज़र'

दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों को देख रहे सहायक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक ने कहा है कि भारत अब भी लश्करे तैबा जैसे पाकिस्तान स्थित सशस्त्र गुटों की गतिविधियों के बारे में चिंतित है.

उनका कहना था इसीलिए इन मामलो पर भारत का और अमरीका का भी ध्यान केंद्रित है.

महत्वपूर्ण है कि भारत द्वारा ख़रीदे जा रहे आधुनिक हथियारों के बारे में ब्लेक का कहना था, "इन (सशस्त्र गुटों की) गतिविधियाँ पर भारत और अमरीका का भी ध्यान केंद्रित है. लेकिन भारत चीन की ओर से सैना की तैनाती को भी गंभीरता से देख रहा है. मुझे लगता है कि भारत हथियारों की जो ख़रीद कर रहा है, उसे इस संदर्भ में देखा जा सकता है."

भारत-अमरीका के संबंधों की बात करते हुए उन्होंने माना कि मल्टी रोल लड़ाकू विमान के बारे में हाल के भारतीय फ़ैसले में दो अमरीकी कंपनियों का चयन न होना निराशाजनक है.

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