पूर्वी राज्यों का सम्मेलन

  • 31 मई 2011

पांच पूर्वी राज्यों की योजना-उम्मीदों से जुड़ा दो-दिवसीय सम्मलेन सोमवार 30 मई को पटना में शुरू हुआ.

बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़,उडीसा और पश्चिम बंगाल के लगभग डेढ़ सौ प्रतिनिधि इसमें भाग लेने पहुंचे.

इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी सम्मलेन में हिस्सा लेना था लेकिन ममता बनर्जी, रमण सिंह और अर्जुन मुंडा नहीं आए.

उन्होंने सम्मेलन के लिए अपने प्रतिनिधि भेज दिए थे.

आतिथ्य का दायित्व सम्हाल रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सम्मलेन में शरीक थे लेकिन पटनायक भी मात्र कुछ घंटों के लिए ही पटना में रुके.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने सम्मलेन के पहले सत्र के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘12 वीं पंचवर्षीय योजना का दृष्टि-पत्र (अप्रोच पेपर) तैयार करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सरकारी और ग़ैर सरकारी लोगों से राय-मशवरा करना इस आयोजन का मक्सद है.’’

उन्होंने पूर्वी राज्यों की इस दलील को वाजिब ठहराया कि कृषि, आधारभूत संरचना ,शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी योजना बनाते समय इस पूर्वी क्षेत्र के प्रति तरज़ीह और प्रोत्साहन वाला रुख़ होना चाहिए.

‘पीपीपी’ यानी पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप के ज़रिए विकास को गति देने और नक़द अनुदान (कैश सब्सीडी) की व्यवस्था लागू करने जैसी सलाह को अहलुवालिया ने उपयोगी बताया.

केन्द्रीय योजना राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने इस मौक़े पर कहा कि जिन राज्यों के लिए निजी पूंजी निवेश आकर्षित नहीं हो पाता है, वहाँ सार्वजानिक क्षेत्र में निवेश की मांग स्वाभाविक है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने राज्य में हो रहे इस सम्मलेन के मद्देनज़र विकास संबंधी अपनी मांगों और ज़रूरतों की लम्बी-चौड़ी फेहरिश्त को ख़ूब प्रचारित कराया था.

उन्होंने सबसे ज़्यादा ज़ोर इस मांग पर दिया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देकर इसे केन्द्रीय उपेक्षा के कारण मिले पिछड़ेपन के रोग से मुक्त किया जाए.

नीतीश कुमार ने कहा,‘‘केन्द्रीय योजनाओं की भरमार करके उनमें राज्य को उलझाना और इस तरह राज्य की अपनी ख़ास ज़रूरतों वाली योजनाओं का प्रभावित होना दुखद स्थिति है. ग़रीबी रेखा के नीच वालों की मदद से लेकर बिजली और सड़क के लिए ज़रूरी केन्द्रीय सहायता तक में कोताही बरती जा रही है.’’

लेकिन मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने इस मौक़े पर स्पष्ट कर दिया कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने जैसी मांग पर किसी तरह की चर्चा इस सम्मलेन की कार्यसूची में नहीं हैं.

सम्मलेन में झारखण्ड के दोनों उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो और हेमंत सोरेन के साथ-साथ योजना आयोग की पूरी टीम और कई जाने-माने विशेषज्ञ-प्रतिनिधयों ने अपनी-अपनी राय दी है.

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