तेलंगाना मुद्दे पर इस्तीफ़े की धमकी

तेलंगाना (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption तेलंगाना के मुद्दे पर पहले भी कई बार हिंसक आंदोलन हो चुके हैं.

आंध्र प्रदेश में एक बार फिर अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर माहौल गर्माने लगा है और लगभग हर राजनैतिक दल में गतिविधियां तेज़ हो गई हैं.

सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सत्तारूढ़ कांग्रेस के सांसदों ने धमकी दी है कि अगर केंद्र सरकार ने जून के महीने में तेलंगाना की मांग पर कोई सकारात्मक फ़ैसला नहीं किया तो वे त्याग पत्र दे देंगे.

यह धमकी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस आला कमान ने उनसे वादा किया था कि चार राज्यों में विधान सभा चुनाव हो जाने के बाद वह तेलंगाना के मुद्दे पर ध्यान केन्द्रित करेगी.

कांग्रेसी सांसदों ने कहा है कि वे तेलंगाना के लिए कोई भी बलिदान देने को तैयार हैं.

इन सांसदों का नेतृत्व करने वाले केशव राव ने कहा कि अगली बार जब वो समाचार माध्यमों के सामने आएंगे तो या तो तेलंगाना राज्य की घोषणा हो जाएगी या फिर वह अपनी कार्य योजना की तैयारी करेंगे.

सांसदों की बैठक

सोमवार को ही तेलंगाना से संबंध रखने वाले एक राज्य मंत्री जे कृष्ण राव के निवास स्थान पर कांग्रेसी सांसदों के एक ग्रुप की बैठक हुई जिसमें मधु याश्की गौड़, एम जगन्नाथम, जी विवेक, जी सुखिंदर रेड्डी और के राजगोपाल रेड्डी शामिल थे.

बैठक में इन समाचारों पर विचार किया गया कि केंद्रीय मंत्री एस जयपाल रेड्डी भी मंत्रिमंडल से त्याग पत्र देकर तेलंगाना आंदोलन में शामिल होने की सोंच रहे हैं.

मधु याश्की ने कहा कि अगर जयपाल रेड्डी ऐसा करते हैं तो सब लोग उन्हें अपने कंधों पर बिठाएँगे और सभी सांसद उनसे अनुरोध करेंगे की वह उनका नेतृव करें और दूसरे राजनैतिक दलों के लोग भी उनके आंदोलन में शामिल होंगे और तब कोई भी तेलंगाना बनने से नहीं रोक सकेगा.

अगर कांग्रेसी सांसद अपनी धमकी पर अमल करते हैं तो इस से केंद्र सरकार के लिए गंभीर समस्या पैदा हो सकती है.

Image caption कांग्रेसी नेता जयपाल रेड्डी पर इस्तीफ़ा देकर आंदोलन में शामिल होने के लिए दबाव बना रहे हैं.

तेलंगाना से कांग्रेस के 11 लोक सभा सदस्य हैं.

जबकि मुख्य विपक्षी दल तेलुगु दसम में अभी भी इस मुद्दे पर रुख स्पष्ट नहीं हो सका है क्योंकि उसके वार्षिक अधिवेशन में तेलंगाना के विषय पर प्रस्ताव पारित नहीं हुआ.

पार्टी अध्यक्ष चंद्राबाबू नायडू ने केवल अपने भाषण में कहा कि उनकी पार्टी तेलंगाना का समर्थन करती है लेकिन इस विषय पर कोई फ़ैसला करना कांग्रेस पार्टी और केंद्र सरकार का काम है.

भारतीय जनता पार्टी भी करीमनगर ज़िले में एक बड़ी जनसभा करके तेलंगाना राज्य की मांग उठाने वाली है.

राजनीतिक पार्टियों के अलावा कई संघटनों पर आधारित तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने भी 15 जून से तेलंगाना के समर्थन में अपना आंदोलन तेज़ करने का फ़ैसला किया है.

समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा कि समिति कांग्रेस और तेलुगु देसम को निशाना बनाएगी क्योंकि तेलंगाना के विषय पर दोनों ही का रुख़ साफ़ नहीं है.

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