'साज़िश के तहत की गई हत्या'

नीतीश कुमार
Image caption नीतीश कुमार ने माना कि डॉक्टर की हत्या के मामले में कई स्तरों पर चूक हुई है.

बिहार के गोपालगंज ज़िला मुख्यालय की जेल में तैनात चिकित्सक डॉ भूदेव सिंह की मौत को अब राज्य सरकार ने भी एक 'साज़िश के तहत की गई हत्या' जैसा मामला बताया है.

राज्य के गृह सचिव की आरंभिक जांच रिपोर्ट में इसी आशय का संकेत पाकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस घटना को प्रशासनिक चूक और लापरवाही का नतीजा माना है.

इस बाबत मुख्यमंत्री ने चूँकि गोपालगंज के जिलाधिकारी पंकज पाल की भूमिका को ग़ैर ज़िम्मेदाराना पाया, इसलिए उनका तबादला कर दिया गया है.

नीतीश कुमार ने घटना के तीन दिन बाद मंगलवार को पटना में पत्रकारों से कहा, ''इस मामले में कई स्तरों से चूकें हुईं हैं और रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है. जो भी दोषी पाए जाएँगे, उन्हें कठिन दंड भुगतना होगा.''

जब मुख्यमंत्री से ये पूछा गया कि इस घटना के बाद हड़ताल पर गये डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा के लिए प्रस्तावित ' मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट ' शीघ्र बनाने की मांग की है तो इस पर नीतीश भड़क उठे.

भड़क उठे नीतीश

उन्होंने काफ़ी तल्ख़ शब्दों में कहा, ''क़ानून इसलिए नहीं बनता है कि समाज की कोई संगठित जमात किसी चीज़ की मांग करती है. किसी जमात के दबाव डालने से क़ानून नहीं बनेगा. ज़रुरत है तो बनेगा और मैं साफ़ कर दूं कि इस इश्यु पर तो मैं किसी डॉक्टर के संगठन से बात तक नहीं करूंगा.''

ज़ाहिर है कि मुख्यमंत्री के इस बयान से आन्दोलनकारी रुख़ अपना रहे डॉक्टरों का रोष और भड़क सकता है. चिकित्सक संगठनों ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में इस बयान को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण कहा है.

उधर बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने अपने सदस्य-चिकित्सक डॉ भूदेव सिंह की हत्या के विरोध में मंगलवार को एक दिन के कार्य-बहिष्कार का ऐलान किया था.

इस हड़ताल के कारण राज्य के तमाम सरकारी अस्पतालों में कामकाज लगभग ठप्प रहा.

डॉक्टर की हत्या

गत शनिवार यानि 28 मई की रात गोपालगंज जेल के चिकित्सक डॉ भूदेव को उसी जेल के कथित ख़ूँख़ार कैदियों ने लगभग आधे घंटे तक इतनी बेरहमी से पीटा कि गंभीर रूप से घायल डॉक्टर की अगले दिन मौत हो गई.

मृतक चिकित्सक के परिजनों का आरोप है कि सम्बंधित कैदी अपने मनोनुकूल जाली सर्टिफ़िकेट बनाने के लिए डॉ भूदेव पर भारी दबाव डाल रहे थे.

जब डॉक्टर नहीं माने तब एक साज़िश के तहत उन्हें इलाज के बहाने धोखे से बुलाया गया और तब उनकी जानलेवा पिटाई की गई.

अब राज्य सरकार ने मृतक डॉक्टर के निकट संबंधी को दस लाख रूपए बतौर मुआवज़ा देने की घोषणा की है. राज्य के कारा महा निरीक्षक को भी इस घटना के बाद बदल दिया गया है.

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