रामदेव ने प्रधानमंत्री की अपील ठुकराई

Image caption बाबा रामदेव ने चार जून से भ्रष्टाचार और विदेशों से काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर आमरण अनशन का ऐलान किया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बाबा रामदेव से आमरण अनशन न करने की अपील की और कहा कि सरकार भ्रष्टाचार से निपटने के लिए हरसंभव उपाय खोज रही है.

इससे पहले प्रधानमंत्री ने बाबा रामदेव को एक पत्र भी लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार उनके साथ काम करने को तैयार है.

लेकिन बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री की अपील ठुकराते हुए कहा है कि 'आंदोलन वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता'.

उल्लेखनीय है कि अपने योग के ज़रिए लोकप्रियता हासिल कर चुके बाबा रामदेव भ्रष्टाचार और काले धन के ख़िलाफ़ शनिवार से दिल्ली में आमरण अनशन पर बैठने वाले हैं.

सहमति

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति भवन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘ यह कोई निजी मुद्दा नहीं है. हम सभी रामदेव से सहमत हैं कि भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है और हम प्रतिबद्ध हैं इस समस्या को ख़त्म करने के लिए. हम अपने सभी संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं इसका सामना करने के लिए.’’

प्रधानमंत्री ने प्रस्तावित लोकपाल बिल में प्रधानमंत्री के कार्यालय को शामिल करने के बारे में पूछे गए सवालों पर कहा कि वो इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि यह उनकी निजी राय का मामला नहीं है.

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सोमवार को नागरिक समाज और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच लोकपाल बिल के दायरे में प्रधानमंत्री को शामिल करने को लेकर मतभेद पैदा हो गए थे.

उधर मध्य प्रदेश में एक योग शिविर में बाबा रामदेव ने साफ़ किया कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मान लेती और बातचीत का कोई संतोषजनक परिणाम नहीं निकलता वो अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे.

अनशन जारी रहेगा

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Image caption अन्ना हज़ारे के बाद प्रधानमंत्री रामदेव के अनशन के लिए तैयार नहीं दिखते

उनका कहना था, ‘‘ मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा. आंदोलन को वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जातीं.’’

इससे पहले प्रधानमंत्री ने रामदेव को एक पत्र भी लिखा था जिसके विवरण अब मिल रहे हैं. पत्र में प्रधानमंत्री ने लिखा था कि सरकार उनके साथ मिलकर काम करने को तैयार है ताकि एक सुदृढ़ भारत का निर्माण हो सके.

प्रधानमंत्री का कहना था कि वित्त मंत्री और उनके अधिकारी लगातार रामदेव से संपर्क में हैं और वो उम्मीद करते हैं कि रामदेव आमरण अनशन के अपने फैसले को रोकेंगे.

प्रधानमंत्री का कहना था, ‘‘ हम रामदेव जी के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं ताकि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए कोई प्रैक्टिकल रास्ता निकल सके. सवाल ये है कि रास्ता क्या हो और वह कितना कारगर होगा.’’

उधर बीजेपी ने रामदेव के आमरण अनशन को समर्थन दिया है और कहा है कि सरकार को जल्द से जल्द विदेशों में पड़े काले धन को भारत वापस लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए.

बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रधानमंत्री को खुला पत्र लिखा है और कहा है कि 2009 के आम चुनावों के घोषणापत्र में कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने वादा किया था कि विदेशों में जमा काला धन वापस लाया जाएगा.

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