'परमाणु संयंत्रों में विश्व स्तरीय इंतज़ाम हों'

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किसी भी परमाणु आपदा से निपटने से संबंधित कार्यप्रणाली की तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए दिल्ली में बुधवार को विशेष बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने की.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की बैठक इस बात पर चर्चा हुई कि अगर देश में किसी भी तरह की आपदा आती है तो इससे निपटने के लिए भारत कितना तैयार है.

बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा है कि सभी परमाणु संयंत्रों पर विश्व स्तरीय सुरक्षा इंतज़ाम होने चाहिए.

जापान में सुनामी और भूकंप के बाद फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र को हुए नुकसान और वहाँ से हुए रेडियोधर्मी रिसाव के बाद दुनिया भर में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ी हुई है.

भारत में भी नए परमाणु संयंत्र लगाए जाने को लेकर कई विरोधी स्वर सामने आए हैं.

महाराष्ट्र के जैतापुर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र का कई लोगों द्वारा विरोध इसकी ताज़ा मिसाल है.

विशेष क़दम

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अपने अफ़्रीका दौरे से लौटने के बाद ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आपदा प्रबंधन पर बैठक बुलाने का फ़ैसला किया था.

बैठक के बाद एनडीएमए के उप अध्यक्ष एम शशिधर रेड्डी ने कहा, “हम दुर्घटनाओं के केवल उन पहलुओं पर ही विचार नहीं करेंगे जो परमाणु संयंत्रों के डिज़ाइन के कारण होती हैं. दिल्ली में मायापुरी जैसी घटना भी हुई थी. विकिरण के ऐसे स्रोत्रों से फ़ुकुशिमा की तुलना में कहीं ज़्यादा लोग हताहत हो सकते हैं.”

पिछले साल दिल्ली के एक कबाड़ बाज़ार की दुकान में आठ लोग कोबाल्ट-60 के विकिरण के प्रभाव में आ गए थे.

बुधवार को हुई बैठक में आपदा से निपटने संबंधी अन्य क़दमों पर भी विचार हुआ.

आपदा से निपटने के लिए नोएडा, कोलकाता और दिल्ली समेत अभी चार जगहों में विशेष दल गठित हैं.

बैठक में कहा गया है कि इस फ़ोर्स के छह और दल बनाए जा सकते हैं और विकिरण का पता लगाने वाले विशेष वाहन के खरीदने पर भी विचार हो सकता है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उन दिशा-निर्देशों पर भी चर्चा की जो विशेष रूप से परमाणु आपदा से जुड़े हैं.

परमाणु हादसे की स्थिति में रासायनिक, रोडियोधर्मिता और जैविक ख़तरों से जूझने के लिए 35 देशों के एक हज़ार पुलिस थानों में डोसीमीटर नाम के विशेष यंत्र लगाने पर भी सोचा जा रहा है.

डोसी मीटर उच्च तकनीक वाला उपकरण है जो विकिरण के स्तर पर नज़र रख सकता है.

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