'जबतक मांगे शत-प्रतिशत पूरी नहीं होंगी, अनशन जारी रहेगा'

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शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रियों और योग गुरू के बीच क़रीब पाँच घंटे चली लंबी बातचीत के बेनतीजा ख़त्म होने के बाद बाबा रामदेव ने कहा है कि जबतक भ्रष्टाचार के ख़ात्मे को लेकर उनकी मांगे पूरी तरह से नहीं मान ली जातीं उनका सत्याग्रह जारी रहेगा.

दिल्ली के एक पाँच सितारा होटल में मनमोहन सिंह सरकार के दो प्रतिनिधि मंत्रियों कपिल सिबल और सुबोध कांत सहाय के साथ हुई बैठक से निकलने के बाद बाबा रामदेव सीधे महात्मा गाँधी के समाधि स्थल राजघाट चले गए जहाँ से वो बाद में कार्यक्रम स्थल रामलीला मैदान पहुँचे.

रामलीला मैदान में मौजूद सैंकड़ों समर्थकों और मीडिया से बाबा रामदेव ने कहा, "जबतक हमारे मूद्दे पूरी तरह से सौ प्रतिशत प्रमाणिकता के साथ, वैधानिक तरीक़े से नहीं मानी जाएंगी, हमारा अनशन जारी रहेगा."

साथ ही रामदेव ने सरकार को ये कहते हुए खुली चूनौती भी दी कि वो अपने कार्यक्रम को किसी भी सूरत में हिंसक नहीं होने देंगे "लेकिन यदि उन्हें दबाने और कुचलने की कोशिश की गई तो ठीक नहीं होगा."

"न आजतक रामदेव को कोई दबा पाया है. न ख़रीद पाया है."

उन्होंने दावा किया कि भारत का 400 लाख करोड़ काला धन विदेशों में ग़ैरक़ानूनी तरह से जमा किया गया है और इसे जल्द से जल्द वापस लाने की कारवाई शुरू की जानी ज़रूरी है.

'फ़ैसला एक दिन में नहीं'

बैठक मे शामिल केंद्रीय संचार मंत्री कपिल सिबल ने पहले कहा था कि इस तरह के मुद्दों पर फ़ैसला एक दिन में नहीं तलाशा जा सकता है. ऐसे मुद्दों के दूरगामी परिणाम होते हैं.

हालांकि कपिल सिबल ने दावा किया, "हमने कई बातें उनके सामने रखी हैं जिनमें कई मुद्दों पर सहमति है."

सरकार और अपने बीच सहमति की बात बाबा रामदेव ने भी दिन में कही थी. हालांकि उन्होंने तब भी कहा था कि उनका सत्याग्रह जारी रहेगा.

बैठक रामदेव की दोपहर की घोषणा के बाद शुरू हुई थी.

जब कुछ हलकों में ये ख़बर आनी शूरू हुई थी कि रामदेव एक सांकेतिक भूख हड़ताल ही करेंगे क्योंकि सरकार के साथ उनका समझौता हो गया है तो ये सवाल भी उठा था कि क्या रामदेव का अब पीछे हटना उनके समर्थकों को भाएगा. लोगों का कहना है कि उनके समर्थकों के कई जत्थे कई दिनों से दिल्ली के रामलीला मैदान में जमे हैं, लोगों ने अनशन कार्यक्रम के लिए दान दिए है.

जानकार कहते हैं कि रामदेव पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानि आरएसएस और उससे जूड़ी संस्थाओं का भी दबाव हो सकता है जिन्होंने खुलकर उनका समर्थन किया है.

इस बीच अन्ना हज़ारे और उनके क़रीबी लोग भी बाबा रामदेव के साथ खड़े होने की बात कह रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अन्ना हज़ारे अपनी कोच्चि यात्रा अधूरी छोड़कर दिल्ली पहुँच रहे हैं और वो सभी रविवार को रामलीला मैदान जाएंगे.

मशहूर वकील और सामाजिक कार्यक्रता प्रशांत भूषण ने कहा कि वो रामदेव की ज़्यादातर मांगों से सहमत हैं क्योंकि उनकी ज़्यादातर मांगे भ्रष्टाचार के विरोध से संबंधित हैं.

पिछले दिनों ये कहा जा रहा था कि रामदेव को सरकार जिस तरह इतनी अहमियत दे रही है और उन्हें मिल रहे जनता के इतने बड़े समर्थन से अन्ना हज़ारे और उनका गुट कुछ ज़्यादा खुश नहीं हैं.

हालांकि जब बाबा रामदेव के भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अनशन की बात शुरू ही हुई थी तो कुछ हलक़ो में ये भी कहा गया था कि आरएसएस इसके सहारे भारतीय जनता पार्टी की गिरती साख को सहारा देने की कोशिश में है.

शूरू से ही बाबा रामदेव के ख़िलाफ़ झंडा बुलंद किए कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने फिर कहा है, "बाबा रामदेव योगिक क्रियाएं सिखाए तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन अगर उन्हें राजनीति करनी है तो खुलकर मैदान में आएं."

दिग्विजय सिंह ने कहा कि ये पूरा कार्यक्रम आरएसएस ने योजनाबद्ध तरीक़े से किया है और सारी तैयारी में उन्हीं के लोग आगे-आगे रहते हैं.

संघ प्रवक्ता राम माधव ने माना है कि संस्था ने अपने लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने की सलाह दी है.

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