बसपा पर नकेल, मंदिर निर्माण का वादा

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भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की जनता से वादा किया है कि सत्ता में आने पर वह बहुजन समाज पार्टी शासन के अपराधों के ट्रायल के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना करेगी.

भाजपा ने दूसरा वादा यह किया है कि वह राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण के लिए हर स्तर पर प्रयत्न करेगी.

भाजपा ने लखनऊ में संपन्न राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक प्रस्ताव के ज़रिए ये वादे किए हैं.

भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में यह भी कहा गया है, ''उत्तर प्रदेश का कायाकल्प करने के लिए पार्टी एक विज़न दस्तावेज तैयार कर रही है.''

प्रस्ताव में कहा गया है, ''सर्वजनहिताय के नाम पर चुन कर आई बसपा सरकार के कुशासन के चलते समाज का प्रत्येक वर्ग त्राहि-त्राहि कर रहा है. सड़कों पर उतरने वाला मायावती सरकार की पुलिस और प्रशासन लाठियों से पीटता है. प्रदेश में लोकतंत्र शर्मसार हो रहा है.''

प्रस्ताव में बसपा के साथ-साथ पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी के प्रदेश सरकार और केंद्र की कांग्रेस सरकार को भी उत्तर प्रदेश की 'खस्ताहालत' के लिए ज़िम्मेदार बताया गया है.

जनाधार वापस पाने की कोशिश

छः पन्ने लंबे इस प्रस्ताव में कमीशनखोरी, अपराधियों द्वारा रंगदारी और इंजीनियर और सीएमओ हत्याकांड, जबरन भूमि अधिग्रहण और किसानों पर पुलिस फायरिंग, बुंदेलखंड की दुर्दशा, बेरोजगारी, किसानों के लिए खाद, पानी और बिजली संकट आदि अनेक समस्याओं का जिक्र है.

प्रस्ताव के अनुसार, ''प्रदेश की जनता के सामने एक ही विकल्प है भाजपा का सुशासन और विकास बनाम बसपा, सपा और कांग्रेस का अवसरवाद.''

प्रस्ताव में वादा किया गया है, ''राम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हो इसके लिए हर स्तर पर भाजपा प्रयत्न करेगी.''

कार्यकारिणी में हुई चर्चा का विवरण देते हुए महामंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रभारी नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मायावती सरकार के हर भ्रष्टाचारी और अपराधी की जगह लखनऊ की जगह जेल में होगी.

तोमर ने बताया कि उत्तर प्रदेश के विकास की रूपरेखा के लिए विज़न दस्तावेज तैयार करने के लिए पूर्व विधान सभाध्यक्ष केशरी नाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता में एक समिति बनायी गयी है.

भापजा की दो दिवसीय कार्यकारिणी की बैठक में उत्तर प्रदेश पर ही फोकस रहा. राम मंदिर आंदोलन के चलते भाजपा केवल एक बार 1991 में विधान सभा में बहुमत लेकर सत्ता में आई थी.

उत्तर प्रदेश से जीते 60 सदस्यों के चलते भाजपा ने केंद्र में भी साझा सरकार बनाई, लेकिन बाद के वर्षों में भाजपा का जनाधार घटता गया.

अब भाजपा उसी खोए जनाधार को वापस पाने के लिए कोशिश कर रही है.

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