क्या रामदेव की मांगों पर अमल संभव?

  • 5 जून 2011
रामदेव
Image caption सरकार की राजनीतिक इच्छा शक्ति को चुनौती दे रही हैं रामदेव की मांगें

भारत सरकार और योग गुरू रामदेव के बीच हुई कई बैठकों में जो सात मांगे रखी गईं थीं उन पर कहां तक अमल करना सरकार के लिए संभव होगा, यह अभी बहस का विषय है.

बाबा रामदेव का कहना है कि विदेशों में ग़ैरक़ानूनी तौर पर जमा भारत का कथित 400 लाख करोड़ काला धन जल्द से जल्द देश में वापस लाया जाए.

दूसरे भारतीयों द्वारा ग़ैर क़ानूनी रूप से विदेशों में जमा की गई हर प्रकार की धन संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए.

एक अन्य प्रमुख मांग है कि भारत में काले धन के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए पांच सौ और हज़ार के बड़े नोट रद्द किए जाएं.

सरकार की मंशा

सवाल उठता है कि क्या सरकार के लिए ये मांगें पूरी करना संभव होगा.

भारत में आर्थिक मामलों के विश्लेषक आलोक पुराणिक ने इस बारे में बीबीसी को बताया कि इसके लिए सरकार में प्रबल राजनीतिक इच्छा शक्ति होना ज़रूरी है.

आलोक पुराणिक ने अमरीका की मिसाल देते हुए कहा, "पहले तो यह जानकारी ज़रूरी है कि किन लोगों का पैसा जमा है, और दूसरा यह कि किस एकाउंट में कितना पैसा है, हाल ही में अमरीका ने स्विटज़रलैंड के बैंकों को धमकी देकर उन खाताधारकों के नाम निकलवा लिए जिनके वहां एकाउंट थे. भारत सरकार अगर प्रतिबद्ध हो तो विदेशों में ग़ैरक़ानूनी तौर पर जमा काला धन वापस लाने में मुश्किल नहीं होनी चाहिए."

विदेशों में भारतीय नागरिकों की ग़ैर क़ानूनी तौर पर जमा की गई काली धन संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किए जाना सरकार के लिए कितना व्यावहारिक होगा?

आलोक पुराणिक का यह कहना था कि इसमें व्यवहारिक दिक़्क़तें आ सकती हैं.

उनका कहना था कि संबद्ध लोगों के नाम पते मालूम कर पाना और उनके खातों की जानकारी निकाल पाना सरकार के लिए एक चुनौती होगी.

"व्यवाहारिक तौर पर इसकी संभावना कम है कि क्योंकि न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए ये साबित करना कि किसकी कितनी संपत्ति ग़ैर क़ानूनी तौर पर विदेशों में है, फिर संबद्ध देश की अदालत के सामने यह साबित करना, और फिर उसे देश में लेकर आना, यह काफ़ी जटिल प्रक्रिया है, लेकिन सरकार के लिए इस क़दम का सांकेतिक महत्व ज़रूर है कि वह ग़ैर क़ानूनी तौर पर विदेश ले जाए गए काले धन पर अंकुश लगाने के लिए कितनी प्रतिबद्ध है."

बाबा रामदेव की पांच सौ और हज़ार के बड़े नोट रद्द कर करने की मांग पर अमल करना क्या सरकार के लिए संभव है?

बड़े नोटों को रद्द करके काले धन पर किसी सीमा तक अंकुश लगाया जा सकता है, इस बारे में नीति नियामकों में दो राय नहीं है.

सरकार एक तय तारीख़ के बाद बड़े नोटों को ख़त्म कर दे तो काले धन को प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी.

जहां तक भ्रष्टाचार के दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग का सवाल है, यह भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक कड़ी चुनौती होगी.

किसी को भ्रष्टाचार का दोषी सिद्ध करने की क़ानूनी प्रक्रिया कितनी अड़चनों और दावपेंचों के बीच से होकर गुज़रती है इस बारे में सभी जानते हैं.

बाबा रामदेव की तीन मांगें और हैं जिन पर सरकार के साथ सहमति बनी बताई गई है.

ये हैं देश के मैडिकल इंजिनियरिंग और कृषि संस्थानों में हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में भी पाठ्यक्रम रखे जाएं.

भूमि अधिग्रहण क़ानून में बदलाव लाया जाए और सार्वजनकि सेवाएं फास्ट ट्रैक पर उपलब्ध करवाई जाएं.

विश्लेषकों की राय मे इनमें से पहली दो पर विवाद की ज़्यादा गुंजाईश नहीं है.

लेकिन तीसरी मांग के लिए सरकार को उन निजी क्षेत्रों से प्रेरणा लेनी होगी, जो सरकार के मुक़ाबले बेहतर और तुरंत सेवा उपलब्ध करवाते हैं.

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