मंत्रियों से मांगा संपत्ति का ब्यौरा

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Image caption सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इन दिनों कई तरफ से घिरे हैं.

सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों और विवादों से घिरे होने के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रिमंडल से कहा है कि वो अपनी संपत्ति का ब्यौरा जारी करें और अपने संबंधियों के व्यापारिक हितों को लेकर पारदर्शिता रखें.

इस कार्रवाई के तहत प्रधानमंत्री ने कहा है कि मंत्री न सिर्फ अपनी बल्कि अपने सगे-संबंधियों की भी संपत्ति का ब्यौरा जारी करें.

साथ ही प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को नसीहत दी कि वो और उनके सगे-संबंधी ऐसे किसी भी व्यापार से दूर रहें जिसमें सरकार या सरकारी विभाग उनके साझीदार हों.

कैबिनेट सचिव ने प्रधानमंत्री की तरफ से मंत्रियों को भेजे इस निर्देश संबंधी पत्र में कहा है कि, 'प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री परिषद के सभी सदस्यों पर लागू आचार संहिता के तहत संपत्ति का ब्यौरा जारी करने का निर्देश दिया है.'

इसके तहत मंत्रियों से अपने और अपने निकट संबंधियों की ओर से किए जा रहे व्यापार, पद-व्यवहार और विदेशी संगठनों में नौकरी का ब्यौरा जारी करने को कहा गया है.

प्रधानमंत्री ने इस आचार संहिता के संबंध में अनुच्छेद 1(ए), 2(ए), 2(ई) और 3.2 का हवाला दिया.

ग़ौरतलब है कि इस आचार संहिता के तहत मंत्रियों को अपनी पत्नी या अपने बच्चों की ओर से की जा रही नौकरियों का न सिर्फ उल्लेख करना होता है बल्कि प्रधानमंत्री या संबंधित मुख्यमंत्री से यह भी पूछना होता है कि वो इस तरह की नौकरियों को जारी रख सकते हैं या नहीं.

प्रधानमंत्री ने सबसे पहले फरवरी 2010 में ये दिशा-निर्देश जारी किए थे और मंत्रियों को सितंबर 2010 तक इस पर अमल करना था.

ग़ौरतलब है कि भ्रष्टाचार और बाबा रामदेव के अनशन से जुड़े विवाद को लेकर सफाई देते हुए हाल ही में प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर चिंतित है और उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई को लेकर गंभीर भी है, लेकिन 'सरकार के पास कोई जादू की छड़ी नहीं.'

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