सीपीएम पोलित ब्यूरो, बुद्धदेब नहीं आए

बुद्धदेब भट्टाचार्जी इमेज कॉपीरइट BBC World Service

पश्चिम बंगाल और केरल में सत्ता से हाथ धो बैठने के झटके से अब तक संभल नहीं सकी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता हैदराबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक कर रहे हैं.

बैठक में पार्टी के सभी बड़े नेता आए हैं मगर पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचार्य इससे ग़ैर हाज़िर हैं.

शुक्रवार को सीपीआई-एम की पोलित ब्यूरो की बैठक हुई जिसमें पश्चिम बंगाल के पार्टी सचिव बिमान बोस ने राज्य में 34 वर्षों से चले आ रहे वाम मोर्चे के सत्ता की समाप्ति के कारणों का आकलन दिया है.

हालाँकि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन जानकार सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में माना गया है कि वाम मोर्चे की सरकार की ग़लत नीतियों और फ़ैसलों के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई.

इस संदर्भ में विशेषकर सिंगुर और नंदीग्राम में भूमि को लेकर ग्रामीण लोगों और विशेषकर किसानों से टकरावों की घटनाओं का उल्लेख किया गया है और इन विषयों से ठीक ढंग से निबटने में सरकार की असफलता के लिए बुद्धदेब भट्टाचार्य की आलोचना की गई है.

बुद्धदेब और अच्युतानंदन

इस बैठक में जहाँ पार्टी महासचिव प्रकाश कारत, सीताराम येचुरी, वृंदा कारत, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी एस अच्युतानंदन मौजूद हैं वहीं बुद्धदेब मौजूद नहीं हैं.

यूँ तो बिमान बोस ने कहा कि बुद्धदेब स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण ही नहीं आए लेकिन समझा जाता है कि वे इसलिए नहीं आए कि बंगाल में हार के कारणों पर ख़ुलकर बहस हो.

जहाँ इस बैठक में बुद्धदेब का घटता हुआ महत्व स्पष्ट था वहीं अच्युतानंदन का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है.

हालाँकि केरल में भी पार्टी की हार हुई ही लेकिन अच्युतानंदन ने पार्टी को लगभग जिता दिया था.

ऐसा लगता है कि प्रकाश कारत और अच्युतानंदन के बीच चल रही ख़ामोश लड़ाई में अब अच्युतानंदन का पलड़ा भारी हो रहा है.

सूत्रों का कहना है कि आगे पार्टी में जो संगठनात्मक फ़ेर-बदल होगा उसमें अच्युतानंदन को ज़्यादा महत्व मिलेगा.

शनिवार और रविवार को पार्टी की केन्द्रीय समिति की बैठक होगी जिसमें चुनावी हार के अलावा देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों पर भी बहस होगी.

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