नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षाकर्मी घायल

बस्तर के नारायणपुर और दंतेवाड़ा में हुए नक्सली हमलों के बाद गुरुवार को पुलिस अभियान के दौरान अलग-अलग वारदातों में दो सुरक्षाकर्मी घायल बताए जा रहे हैं.

जबकि पुलिस ने एक नक्सली को मारने का दावा किया है. पहली घटना नारायणपुर के कोंगेरा और देवगांव के बीच घटी जब माओवादी छापामारों और सुरक्षा बलों के जवानों के बीच जमकर मुठभेड़ हुई.

दूसरी घटना नारायणपुर के ही कोचवाही नाला के पास की है जहाँ एक पुलिया में मिली बारूदी सुरंग को नष्ट करने के क्रम में धमाका हुआ. इस धमाके में ज़िला पुलिस बल का एक जवान घायल हो गया.

पुलिस का कहना है कि जिस सड़क में पुलिया के नीचे बारूदी सुरंग मिली थी वह रास्ता कुक्राझोर कैंप की ओर जाता है.

पुलिस का कहना है कि अगर यह बारूदी सुरंग नहीं मिली होती तो कोई बड़ी घटना घट सकती थी क्योंकि कैंप से आने-जाने के लिए सुरक्षा बल के जवान इसी रास्ते का इस्तेमाल करते थे.

इससे पहले दंतेवाड़ा ज़िले में माओवादियों द्वारा किए गए एक बारूदी सुरंग के विस्फोट में 10 सुरक्षा कर्मी मारे गए थे जबकि तीन जवान घायल बताए जाते हैं. घटना स्थल दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर कटेकल्यान के पास कटम का इलाका बताया जाता है जहाँ सुरक्षा कर्मियों का एक बारूदी सुरंग निरोधक वाहन विस्फोट की चपेट में आ गया.

नक्सली हमला

मारे गए लोगों में सात विशेष पुलिस अधिकारी हैं जबकि तीन जवान जिला पुलिस बल के हैं. उनका कहना है कि यह सभी नियमित तलाशी अभियान से लौट रहे थे जब इनका वाहन पहले से बिछाई गई बारूदी सुरंग की चपेट में आ गया. पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विस्फोट इतना ज़ोरदार था कि वाहन के परखचे उड़ गए. कहा जा रहा है कि घटनास्थल के पास माओवादी पहले से घात लगाकर बैठे हुए थे, विस्फोट के बाद उन्होंने घायल पुलिसकर्मियों पर गोलियां भी चलाईं. घटना में तीन जवानों के घायल हुए है.

विशेष पुलिस अधिकारियों को माओवादी अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं क्योंकि ये स्थानीय युवक हैं जो यहाँ की भाषा और भौगोलिक स्थिति से परिचित हैं. छत्तीसगढ़ की सरकार ने बड़े पैमाने पर नक्सल विरोधी अभियान के लिए स्थानीय युवकों को बतौर विशेष पुलिस अधिकारी बहाल किया है. मात्र तीन हज़ार रूपए प्रति माह की तनख्वाह के बदले यह युवक अपनी जान की बाज़ी तक लगा देते हैं.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट नें छत्तीसगढ़ की सरकार द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों को बिना प्रशिक्षण के हथियार देने की आलोचना की थी. दंतेवाड़ा की घटना के बाद पुलिस अधिकारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि किन परिस्थितियों में इतने सारे विशेष पुलिस अधिकारी एक साथ अभियान में निकले हुए थे.

दूसरा सवाल उठता है कि संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाकर्मियों को वाहन से यात्रा नहीं करने की हिदायत दी गई है. मगर सभी पुलिसकर्मी वाहनों पर सवार होकर जा रहे थे.

दंतेवाड़ा की घटना पिछले २४ घंटों में बस्तर संभाग में हुआ दूसरा बड़ा नक्सली हमला है. इससे पहले नारायणपुर जिले में माओवादी छापामारों नें राज्य सशस्त्र पुलिस के एक कैंप पर हमला कर पांच जवानों को मार दिया था. सभी जवान झाराघाटी में हाल ही में स्थापित किए गए कैंप में तैनात थे. घटना सुबह लगभग सात बजे की है जब यह जवान कैंप के पास ही मौजूद थे. छत्तीसगढ़ में पिछले पिछले 20 दिनों के अन्दर हुआ यह तीसरा सबसे बड़ा नक्सली हमला है. 24 मई को महासमुंद जिले के गरियाबंद में हुए माओवादी हमले में एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित नौ पुलिसकर्मी मारे गए थे.

वैसे पुलिस के आला अधिकारी यह मानते हैं कि यह सभी वारदातें सुरक्षाकर्मियों की चूक के कारण हुईं हैं. राज्य के गृह मंत्री ननकीराम कँवर का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान में लगे सुरक्षा बलों को अपनी रणनीति बदलनी होगी.

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