ज़मीन अधिग्रहण के विरोध में मानव श्रृंखला

  • 11 जून 2011
विरोध प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पॉस्को के खिलाफ़ उड़ीसा में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

भारत के पूर्वी राज्य उड़िसा के जगतसिंहपुर ज़िले में प्रस्तावित पोस्को स्टील प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण को रोकने के लिए महिलाओं और बच्चों सहित लगभाग 2000 लोगों ने मानव श्रृंखला बनाई है.

एक करोड़ 20 लाख टन के पोस्को प्लांट का विरोध करने के लिए यह मानव श्रृंखला शुक्रवार को बनाई गई और लोग आज भी मौके पर डटे हुए हैं.

स्थानीय लोगों को समर्थन में शनिवार को पांच वामदलों के कार्यकर्ताओं ने भी गोविंदपुर में भूमि अधिग्रहण का जमकर विरोध किया.

गोविंदपुर को पोस्को और स्थानीय लोगों बीच पिछले छह सालों से चल रही लड़ाई का आखरी पड़ाव बताया जा रहा है.

पोस्को का विरोध कर रहे, ‘पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति’ ने कल अपना आखिरी पासा फेंकते हुए एक मानव दीवार बनाई है.

कोशिशें बेकार

इसमें सबसे आगे हैं लगभग 500 बच्चे, उनके पीछे हैं औरतों और बूढों की कतार. कल लगभग दिनभर तपती धूप में इन बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने रेत पर लेटकर पुलिस का प्रतिरोध किया.

प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर वहां से उठाने क़ी प्रशासन की सारी कोशिशें बेकार साबित हुईं.

केवल 400 मीटर की दूरी पर प्रदर्शनकारी और पुलिस लगभग पांच घंटे तक आमने सामने रहने के बाद शाम को आखिरकार पुलिस बल को हटा लिया गया.

लेकिन आज सुबह पुलिस फिर गोविंदपुर गाँव की सीमा पर पहुँच गयी और दोनों पक्ष एक दूसरे के आमने सामने हो गए.

प्रशासन के प्रवेश को रोकने के लिए बच्चों के इस्तेमाल को पुलिस ने गैर कानूनी बताया है.

जगतसिंघपुर के एसपी एस देवदत्त सिंह का कहना है, "यह शिशु अधिकार कानून का खुला उल्लंघन है. इस जमावड़े को ग़ैर कानूनी घोषित किया जा चुका है. इसके बावजूद हमने बल प्रयोग करने के बजाय लोगों को समझा कर शांतिपूर्ण ढंग से मामले को सुलझाने की पूरी कोशिश की है."

लेकिन पोस्को विरोधियों का कहना है की प्रशासन जमकर बल का प्रयोग कर रहा है.

पोस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के अध्यक्ष अभय साहू ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया, "लोगों के विरोध के बावजूद उनकी ज़मीन छीनी जा रही है. पान के खेतों को न तोड़ने के लिए गिड़गिड़ा रहे लोगों को लाठी से पीटा जा रहा है. अगर यह बल प्रयोग नहीं है तो क्या है?

गोविंदपुर की सीमा पर लोगों की मानव श्रृंखला के बावजूद प्रशासन द्वारा पान के खेतों का अधिग्रहण जारी है.

कल 17 खेत नष्ट किए गए थे और आज 24 और खेत तोड़े गए. लेकिन इनमें से केवल तीन लोगों ने ही मुआवज़े क़ी राशी स्वीकार क़ी है जबकि बाकियों ने चेक लेने से इंकार कर दिया है.

पुलिस कार्रवाई का संकेत

लेकिन भूमि अधिग्रहण क़ी देख-रेख कर रहे जगतसिंहपुर के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सरोज कांत चौधरी इसके लिए कुछ और ही कारण बताते हैं.

उन्होंने बीबीसी को टेलिफ़ोन पर बताया, "70 फीसदी से ज़्यादा लोग अपनी ज़मीन देने के लिए तैयार हैं. बाकी 30 फ़ीसदी में से ज़्यादातर लोग ज़मीन देना तो चाहते हैं, लेकिन प्रतिरोध समिति के डर से यह बात कह नहीं पा रहे. एक तरफ वो धरने पर बैठे हैं और दूसरी तरफ उनके खेत लेकर पैसे देने के लिए हमसे गुहार लगा रहे हैं."

यह पूछे जाने पर कि क्या पुलिस तैनात करके लोगों से ज़मीन अधिकग्रहित करना मुख्यमंत्री की उस घोषणा के खिलाफ़ नहीं है जिसमें उन्होंने कहा था कि ज़मीन अधिग्रहण शांतिपूर्ण ढंग से किया चौधरी ने कहा, ''सबसे पहले तो मैं ये स्पष्ट कर दूं कि हम भूमि अधिग्रहण नहीं कर रहे बल्कि सरकारी ज़मीन पर लोगों का अवैध कब्ज़ा हटा रहे हैं, इसलिए ये घोषणा का उल्लंघन नहीं.''

आगे की कार्रवाई के बारे में चौधरी ने कहा कि रोजो पर्व की छुट्टियों के लिए पान के खेत तोड़ने का काम कल से चार-पांच दिन के लिए बंद रहेगा हम उम्मीद करते हैं तबतक बातचीत के ज़रिए समाधान निकल जाएगा.

हालांकि ज़िलाधिकारी नारायन चंद्र जेना ने पुलिस कार्रवाई का संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि अगर लोगों ने अपनी गैर कानूनी घेराबंदी नहीं तोड़ी तो उन्हें उठाने के लिए कार्रवाई करनी होगी.

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