बाबा रामदेव का अनशन ख़त्म

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योगगुरू बाबा रामदेव ने आख़िर नौवें दिन देहरादून के अस्पताल में अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है.

श्रीश्री रविशंकर, मोरारी बापू और हरिद्वार के क़रीब 50 संतों की उपस्थिति में बाबा रामदेव ने मौसमी का जूस पीकर अपना अनशन ख़त्म किया.

बाबा रामदेव के साथ अनशन कर रहे उनके सहयोगी बालकृष्ण ने भी अपना अनशन ख़त्म कर दिया है.

आमरण अनशन के दौरान स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दोनों को अस्पताल में भर्ती किया गया था.

कौन हैं बाबा रामदेव?

बाबा रामदेव की ओर से अखिल भारतीय संत समाज, मोरारी बापू और बालकृष्ण ने कहा है कि उनका आमरण अनशन ख़त्म हो गया है लेकिन काले धन को लेकर चल रहा आंदोलन जारी रहेगा.

उनका इलाज कर रहे चिकित्सकों की ओर से डॉक्टर दीपक गोयल ने कहा है कि बाबा रामदेव का स्वास्थ्य ठीक है और जल्द ही उन्हें वॉर्ड में लाया जाएगा और एक-दो दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी.

बाबा रामदेव का अनशन ख़त्म होने की घोषणा के साथ अस्पताल के बाहर उनके भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है.

ख़राब होता स्वास्थ्य

बाबा रामदेव ने चार जून को दिल्ली में अपना अनशन शुरु किया था. लेकिन रात को दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई कर उन्हें वहाँ से हटा कर देहरादून भेज दिया था.

इसके बाद बाबा रामदेव ने हरिद्वार स्थित अपने आश्रम में अपना आमरण अनशन जारी रखा था.

हालत बिगड़ने के बाद उन्हें शुक्रवार को एंबुलेंस के ज़रिए देहरादून लाया गया था और अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. वहाँ उन्हें सघन चिकिस्ता कक्ष यानी आईसीयू में रखा गया था और ग्लूकोज़ देना शुरु कर दिया था.

शनिवार शाम को डॉक्टरों ने कहा था कि रामदेव की हालत स्थिर है हालांकि उनका रक्त चाप गिर रहा है.

चिकित्सकों के हवाले से कहा गया था कि अगर उनके स्वास्थ्य में इसी तरह की गिरावट जारी रही तो उनके कोमा में जाने का ख़तरा है.

इसके बाद आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और दूसरे संतों ने उनको आमरण अनशन ख़त्म करने के लिए मनाने की कोशिशें शुरु की थीं.

रविवार की सुबह श्री श्री रविशंकर ने बाबा रामदेव से तीसरी बार मुलाक़ात की थी और इसके बाद अनशन ख़त्म करने की घोषणा की गई.

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने साफ़ कर दिया था कि सरकार बाबा रामदेव से इस बारे में कोई बातचीत नहीं करने जा रही है.

संकल्प

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Image caption चर्चा थी श्री श्री रविशंकर केंद्र सरकार और बाबा रामदेव के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं

बाबा रामदेव के साथ उनके निकटतम सहयोगी बालकृष्ण ने अपना आमरण अनशन ख़त्म कर दिया है.

अनशन ख़त्म करने के बाद मोरारी बापू के साथ पत्रकारों के सामने आए बालकृष्ण ने कहा, "श्री श्री रविशंकर, मोरारी बापू और हरिद्वार के सभी अखाड़ों के संतों के अनुरोध और सामाजिक संगठनों के आग्रह को शिरोधार्य करते हुए बाबा रामदेव ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है."

उन्होंने कहा, "अपना आमरण अनशन समाप्त करते हुए उन्होंने संकल्प लिया है कि वे अपनी अंतिम सांस तक इस आंदोलन को अंतिम लक्ष्य तक पहुँचाएँगे."

इस सवाल पर कि उनकी मांगों पर सरकार तो झुकी नहीं है तो क्या ये बाबा रामदेव की हार नहीं है, बालकृष्ण ने कहा, "ये हमारी हार इसलिए नहीं है क्योंकि काले धन के मामले पर बाबा रामदेव का आंदोलन पूरे समाज को संगठनात्मक रुप में खड़े करने और सरकार की आंख खोलने का अभियान था और अब समाज खड़ा हो गया है."

उन्होंने कहा, "न तो ये हार है और न समापन क्योंकि आंदोलन अभी जारी रहेगा और हम निरंतर संघर्ष करते रहेंगे."

जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने (बालकृष्ण ने) और बाबा रामदेव ने एक साथ ही आमरण अनशन शुरु किया था, वे तो पत्रकारों से बात कर रहे हैं लेकिन बाबा रामदेव योगी होने के बावजूद अस्पताल के बिस्तर पर हैं तो उन्होंने सफ़ाई देते हुए कहा कि इससे पहले देश भर में एक लाख किलोमीटर की यात्रा के दौरान भी बाबा रामदेव का खाना पीना ठीक से नहीं चल रहा था.

विवादों से घिरा आंदोलन

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Image caption पुलिस के आने के बाद बाबा रामदेव महिलाओं के वस्त्र पहनकर निकल भागने का प्रयास कर रहे थे

दिल्ली के रामलीला मैदान में अपना आमरण अनशन करने के लिए जब बाबा रामदेव दिल्ली पहुँचे तो उनसे बात करने के लिए सरकार के वरिष्ठ मंत्री प्रणब मुखर्जी सहित चार केंद्रीय मंत्री दिल्ली के विमानतल पर पहुँच गए थे.

तीन जून को दो दौर की बातचीत के बाद बाबा रामदेव ने कहा था कि सरकार ने उनकी बहुत सी मांगें मान ली हैं लेकिन वे अपनी सभी मांगों को मनवाने की बात करते रहे.

चार जून को उन्होंने अपना आमरण अनशन शुरु किया और देखते ही देखते रामलीला मैदान में देश भर से उनके भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी.

अनुमान है कि शाम ढलते तक रामलीला मैदान में लगाए गए विशालकाय पंडाल में कोई पचास हज़ार लोग एकत्रित हो चुके थे.

इस बीच बाबा रामदेव के तेवर तीखे होते जा रहे थे.

शाम को केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एक पत्रवार्ता करके बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण का लिखा वह पत्र मीडिया को जारी कर दिया जिसमें बाबा रामदेव ने सहमति जताई थी कि चार जून को दोपहर बाद वे अनशन ख़त्म करने की घोषणा कर देंगे.

इसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया.

दिल्ली पुलिस ने शनिवार, चार जून की आधी रात के बाद रामलीला मैदान में कार्रवाई करके बाबा रामदेव को वहाँ से हटा लिया था और उनके समर्थकों से मैदान को खाली करवा लिया था.

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Image caption रामलीला मैदान में शनिवार को आधी रात से रविवार की सुबह तक अफ़रा-तफ़री का माहौल रहा

इस कार्रवाई के बीच पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे. बाबा रामदेव के भक्तों ने पुलिस पर पिटाई और बर्बरता के आरोप लगाए थे.

दिल्ली पुलिस और सरकार का कहना है कि पुलिस ने कोई बर्बरता नहीं की और जो लोग वहाँ घायल हुए वो लोगों के बीच मची भगदड़ का नतीजा था.

बाबा रामदेव के समर्थकों का कहना था कि दिल्ली पुलिस ने आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने यह कार्रवाई की है.

दिल्ली पुलिस का कहना था कि बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान में अधिकतम पाँच हज़ार लोगों के साथ योग शिविर की अनुमति ली थी जबकि वे पचास हज़ार लोगों को इकट्ठा करके आंदोलन करने लगे थे यह नियमों का उल्लंघन था इसलिए उन्हें वहाँ से हटा दिया गया.

दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को दिल्ली से निकालकर हरिद्वार में स्थित उनके आश्रम पहुँचा दिया था जहाँ उन्होंने अपना आमरण अनशन जारी रखा था.

इस बीच बाबा रामदेव ने 11 हज़ार युवकों की सशस्त्र सेना बनाने की घोषणा कर दी जिस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई और उन्हें अपने बयान पर सफ़ाई देते हुए इसे एक तरह से वापस लेना पड़ा.

इस बयान की वजह से अन्ना हज़ारे जैसे कई लोगों ने रामदेव से किनारा कर लिया था.

इसके बाद रामदेव के स्वास्थ्य में गिरावट की ख़बरें आने लगीं और आख़िर आठ दिन के अनशन के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया है.

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