'कनिमोड़ी से पूछताछ क्यों नहीं'

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Image caption कनिमोड़ी और शरथ कुमार फ़िलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2-जी मामले में डीएमके प्रमुख एम करूणानिधि की बेटी और पार्टी सांसद कनिमोड़ी की ज़मानत याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य जाँच एजेंसी सीबीआई को नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा है कि वो नोटिस का जवाब 20 जून तक दे.

इसका मतलब है कि कनिमोड़ी को तबतक तक जेल में रहना होगा.

हालांकि अदालत ने सीबीआई से ये सवाल किया कि गिरफ़्तारी के बाद से कनिमोड़ी से कोई पूछताछ क्यों नहीं की गई उसने डीएमके नेता से साफ़ कहा कि अभी के हालात में उन्हें ज़मानत मिलने की बहुत कम संभावना है.

आरोप है कि 2-जी मामले में गिरफ़्तार किए गए आसिफ़ बलवा से जुड़ी एक कंपनी ने कमिमोड़ी के टीवी चैनेल कलैगनार टीवी को 200 करोड़ रूपये 'क़र्ज' दिए थे.

इलज़ाम लगाया गया है कि ये 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के लिए दिया गया रिश्वत है.

कनिमोड़ी कलैगनार टीवी की एक बड़ी शेयरधारक हैं.

क़रीबी

2-जी स्पेक्ट्रम मामले में जेल में बंद पूर्व संचार मंत्री ए राजा का तालुक्क़ भी डीएमके से है और वो कनिमोड़ी के बहुत क़रीबी बताए जाते हैं.

डीएमके सांसद कनिमोड़ी की गिरफ़्तारी दिल्ली की एक विशेष अदालत में उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद हुई थी और फ़िलहाल उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी ओर उनकी टेलीवीजन चैनेल कलैगनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरथ कुमार की ज़मानत याचिका ये कहते हुए ख़ारिज कर दी थी कि दोनों लोग ख़ासा राजनीतिक तौर रसूख़वाले हैं और उन्हे छोड़े से गवाहों पर दबाव बनाए जाने का ख़तरा है.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी करते हुए ये भी कहा कि वो कलैगनार टीवी को कथित तौर पर दिए गए 200 करोड़ रूपये का ब्योरा भी वो अदालत को बताएं.

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Image caption जयललिता और करूणानिधि में पुरानी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है.

भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मानवधिकार उलंघन का मामला बताते हुए दो जजों की खंडपीठ ने जाँच एजेंसी से कहा कि वो इस बात का भी अनुमान लगाएं कि लाइसेंस आवंटन घोटाले के कारण ख़ज़ाने को कितना नुक़सान हुआ है.

जयललिता

इस बीच डीएमके के विरोधी दल और राज्य में हुए चुनाव के बाद सत्ता में आई एआईडीएमके प्रमुख जे जयललिता सोमवार दिन में दिल्ली पहुँच रही हैं जहाँ वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करेंगी.

जयललिता ने साफ तौर पर कहा है कि अगर कांग्रेस डीएमके से अलग हो जाए तो उनका दल केंद्र सरकार को समर्थन देने को तैयार है.

हालांकि कनिमोड़ी की गिरफ़्तारी और 2-जी मामले में चल रही सीबीआई की छानबीन को लेकर डीएमके कांग्रेस से नाख़ुश है लेकिन फ़िलहाल उसने केंद्र में सहयोगी दल से अलग होने की खुली घोषणा नहीं की है.

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