लोकपाल बैठक से पहले अनबन बढ़ी

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Image caption अन्ना हज़ारे भी मसौदा समिति के सदस्य हैं

बुधवार को होने वाली लोकपाल मसौदा समिति की बैठक के पहले अन्ना हज़ारे की टीम और कांग्रेस पार्टी के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है.

अन्ना हज़ारे ने दिल्ली पहुँचकर कांग्रेस के आरोपों का मज़ाक तो उड़ाया, लेकिन उन्होंने सरकार के साथ मतभेद सुलझाने की भी बात कही.

दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा है कि ये अलोकतांत्रिक है कि एक व्यक्ति अपने विचारों को थोपने की कोशिश कर रहा है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी का मुखौटा होने के आरोपों पर अन्ना हज़ारे ने कहा कि वे किसी को आरोप लगाने से नहीं रोक सकते, लेकिन नागरिक समाज के लोगों को भी मुद्दे उठाने से कोई नहीं रोक सकता.

मतभेद

पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "बातचीत से ही मतभेद सुलझाए जा सकते हैं. टकराव से कुछ नहीं होगा. हमारा मानना है कि सरकार ने हमारी कुछ मांगें मान ली है लेकिन अब भी बहुत कुछ किया जाना है. अगर 30 तारीख़ तक कुछ नहीं होता है, तब हम आगे के क़दम पर विचार करेंगे."

अन्ना हज़ारे ने कहा कि बुधवार की बैठक में नागरिक समाज के लोग अपनी बात रखेंगे और अगर उनकी मांगें नहीं मानीं गई तो वे फिर से आंदोलन करेंगे.

इस बीच कांग्रेस ने अन्ना हज़ारे और उनकी टीम पर फिर निशाना साधा है. कांग्रेस का कहना है कि क़ानून बनाने का काम संसद और विधानसभा का है और किसी एक व्यक्ति को अपने विचार नहीं थोपने चाहिए.

पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा, "ये लोकतांत्रिक नहीं कि एक व्यक्ति अपनी बात थोपने की कोशिश कर रहा है. ये नहीं हो सकता. फ़ैसला लोकतांत्रिक तरीक़े से होगा."

हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि राष्ट्रहित में सभी को मिलकर काम करना चाहिए.

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