तेलंगाना पर कांग्रेस की अहम बैठक

तेलंगाना के लिए आंदोलन इमेज कॉपीरइट AFP

आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में गतिरोध एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है. कांग्रेस की कोर कमेटी की एक बैठक दिल्ली में बुधवार को होने जा रही है.

इस बैठक में पार्टी तेलंगाना की मांग पर विचार करेगी और इसके समाधान के लिए कई विकल्पों का जायज़ा लेगी.

लेकिन तेलंगाना क्षेत्र से संबंध रखने वाले कांग्रेस के सांसदों और दूसरे नेताओं ने यह चेतावनी दी है कि वे अलग राज्य से कम कोई चीज़ स्वीकार नहीं करेंगे.

सांसदों ने तो यह धमकी भी दी है कि अगर अबकी बार तेलंगाना के पक्ष में फ़ैसला नहीं किया गया तो वो संसद से त्यागपत्र दे देंगे.

घेराव

मंगलवार को जब तेलंगाना के सांसद दिल्ली के लिए रवाना हो रहे थे, तो तेलंगाना के वकीलों ने हवाई अड्डे पर उनका घेराव किया और उनसे कहा कि वो तेलंगाना राज्य लिए बिना दिल्ली से वापस ना आएँ. उनमें से एक सांसद जी विवेक ने कहा कि अगर तेलंगाना राज्य नहीं दिया गया तो फिर सांसदों को निर्णायक और सख़्त क़दम उठाना पड़ेगा.

राज्य में तेलंगाना के एक मंत्री कृष्ण राव पहले ही इस मुद्दे पर त्यागपत्र दे चुके हैं. एक और मंत्री के वेंकट रेड्डी ने कहा कि वे और दूसरे कई मंत्री और विधायक भी तेलंगाना के लिए त्यागपत्र देने पर तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि वे आमरण अनशन पर भी जाने के लिए तैयार हैं.

दार्जीलिंग मॉडल

लेकिन इन सब धमकियों के बावजूद ऐसा लगता है कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व तेलंगाना पर जल्द कोई फ़ैसला करना नहीं चाहता.

ऐसे संकेत हैं कि कांग्रेस पार्टी तेलंगाना राज्य दिए बिना ही इस समस्या को सुलझाने के दूसरे रास्तों पर विचार कर रही है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान उसी दार्जीलिंग मॉडल को लागू करने पर विचार कर रही है जिसके अंतर्गत तेलंगाना को स्वायत्तता और एक आर्थिक पैकेज दिया जा सकता है. कांग्रेस के लिए अलग राज्य की मांग स्वीकार करना आसन नहीं है. एक तो इससे आंध्र और रायल सीमा में उसे नुक़सान उठाना पड़ सकता है और दूसरे केंद्र सरकार में शामिल दूसरे दल भी उसे नहीं मानेंगे.

इनमें विशेषकर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस शामिल है. इधर दूसरे दलों ने भी कहा है कि वे तेलंगाना राज्य से कम कोई चीज़ स्वीकार नहीं करेंगे. तेलुगू देशम के तेलंगाना फ़ोरम के संयोजक दयाकर राव ने कहा कि उन्हें दार्जीलिंग मॉडल स्वीकार नहीं है क्योंकि तेलंगाना की जनता के लिए यह स्वाभिमान का सवाल है.

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