डीयू के लिए चाहिए सौ प्रतिशत अंक

दिल्ली के छात्र (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption 100 फ़ीसदी तक कट-ऑफ़ पहुंचने से कई छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज में दाख़िला नहीं मिल सकेगा.

एक ओर तो सरकारें छात्रों के लिए पढ़ाई का बोझ कम करने और प्रतियोगिता का तनाव कम करने की बातें करती हैं लेकिन दूसरी ओर गला-काट प्रतियोगिता बढ़ती जा रही है.

इसका एक उदाहरण दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में दाखिले के लिए जारी कट-ऑफ़ सूची है.

इसमें एक कॉलेज ने उन छात्रों को दाखिले के लिए आमंत्रित किया है जिन्होंने 100 प्रतिशत अंक हासिल किए हों.

एक और कॉलेज ने 99 प्रतिशत वाले छात्रों को दाखिला देने की बात कही है.

इस कट ऑफ़ सूची को लेकर दिल्ली में ख़ासा हंगामा खड़ा हो गया है और केंद्र सरकार को कहना पड़ा है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी को इस पर फिर से विचार करना चाहिए.

सौ प्रतिशत अंक

Image caption केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने भी इस कट ऑफ़ सूची पर चिंता ज़ाहिर की है

कट-ऑफ़ सूची वह सूची है जिसके आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेज अपने यहाँ दाखिला देते हैं.

पहले छात्रों के आवेदन के बाद उपलब्ध सीटों के आधार पर कॉलेज कट-ऑफ़ सूची जारी करते थे लेकिन इस वर्ष से यह पद्धति बदलते हुए कॉलेजों से कहा गया कि वे पहले कट-ऑफ़ सूची जारी कर दें जिससे कि छात्रों को कई कॉलेजों में आवेदन करने का झंझट न करना पड़े.

मंगलवार की रात को कॉलेजों की ओर से पहली कट-ऑफ़ सूची जारी की गई है.

दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कॉलेज श्रीराम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स (एसआरसीसी) ने बीकॉम ऑनर्स कोर्स के लिए 96 से 100 प्रतिशत पाने वाले छात्रों को आवेदन करने के लिए कहा है.

ये 100 प्रतिशत अंक उन छात्रों के लिए ज़रुरी होगा जिन्होंने अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई में कॉमर्स की पढ़ाई न की हो. कॉलेज का कहना है कि ऐसे छात्रों को बारहवीं के किन्हीं चार विषयों में 100 प्रतिशत अंक मिले होने चाहिए.

इसी तरह एक और प्रतिष्ठित कॉलेज हिंदू कॉलेज ने भी 95.5 से 99 प्रतिशत पाने वाले छात्रों को आमंत्रित किया है.

ऐसे बहुत से कॉलेज हैं जिनमें पहली कट-ऑफ़ सूची में 95 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले छात्रों को दाखिला ही नहीं मिल सकेगा.

चिंता और निंदा

ऐसा नहीं है कि ये दाखिला लेने का अंतिम मौक़ा है. अभी कॉलेज दूसरी, तीसरी और ज़रुरत पड़ने पर चौथी कट-ऑफ़ सूची भी जारी करेंगे.

लेकिन इस पहली सूची ने अभिभावकों और छात्रों के अलावा सरकार और विपक्ष के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी हैं.

100 प्रतिशत कट-ऑफ़ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इसे अटपटा क़रार दिया और समझ से परे बताया.

उन्होंने कहा कि उन अभिभावकों के बारे में सोचकर दुख हो रहा है, जिनके बच्चों ने जमकर मेहनत की और 97−98 परसेंट नंबर हासिल किए.

एक भारतीय न्यूज़ चैनल से बात करते हुए सिब्बल ने यह भी कहा कि वह वाइस चांसलर और कॉलेज से कहेंगे कि इस पर विचार करें.

इस मामले में दिल्ली विश्वविधालय के कुलपति दिनेश सिंह ने कहा कि दूसरी एडमिशन लिस्ट में कट-ऑफ में कमी आएगी.

दिल्ली के कॉलेजों में ऊंची कट ऑफ को लेकर सिर्फ़ मानव संसाधन विकास मंत्री ही नहीं कुछ अभिभावक भी काफ़ी चिंतित है.

उन अभिभावकों में से एक हैं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह, क्योंकि उनके दोनों बेटे दिल्ली के एक स्कूल में पढ़ रहे हैं.

उमर ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा है, "मैं अपने बेटों को लेकर परेशान हूं, जब ज़मीर कॉलेज जाएगा तब कट-ऑफ और ऊंचा हो जाएगा."

उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि आज के ‘डरावने’ कट-ऑफ को देखते हुए अपना कॉलेज 20 साल पहले पूरा करने को लेकर वह बहुत ख़ुश हैं.

उन्होंने कहा, "इस तरह के कट-ऑफ नंबरों को देखते हुए, मैं पत्राचार से कोर्स करता क्योंकि मैं ‘पास कोर्स’ में भी प्रवेश नहीं ले पाता."

जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येटुरी ने इस कट-ऑफ़ सूची पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक टेलीविज़न चैनल से कहा, "अगर ख़ुद शेक्सपीयर भी आ जाएँ तो वो अंग्रेज़ी में सौ प्रतिशत अंक हासिल नहीं कर सकते."

बहरहाल छात्र इसके बाद आने वाली कट-ऑफ़ सूचियों के इंतज़ार में हैं.

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