सहमति न बनी तो फिर अनशन: अन्ना

लोकपाल मसौदा समिति की बैठक इमेज कॉपीरइट Reuters

समाज सेवी अन्ना हज़ारे ने लोकपाल विधेयक को लेकर सरकार पर मुकरने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर सहमति नहीं बनती है तो वे 16 अगस्त से एक बार फिर आमरण अनशन शुरु करेंगे.

उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने के लिए तैयार हैं.

लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनी समिति में सहमति न बन पाने की घोषणा के बाद एक पत्रवार्ता को संबोधित करते हुए अन्ना हज़ारे ने कहा कि भ्रष्टाचार का मुद्दा सरकार के एजेंडा में ही नहीं है.

हालांकि अन्ना हज़ारे और नागरिक समाज के अन्य सदस्यों ने ये स्पष्ट किया है कि वे 20 और 21 जून को बुलाई गई बैठक में शामिल होंगे और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ सहमति बनाने की पूरी कोशिश करेंगे.

'मंशा नहीं है'

बुधवार को समिति की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने स्वीकार किया था कि कई अहम मुद्दों पर असहमति है और ये फ़ैसला किया गया है कि दोनों पक्ष अपना-अपना मसौदा तैयार करें और दोनों को ही मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाए.

उन्होंने कहा,"सरकार अब तक कह रही थी आप अपने सुझाव दे दो हम उस पर विचार करेंगे और एक अच्छा मसौदा तैयार करेंगे लेकिन अब कह रही है अपना मसौदा दे दो और हम अपना मसौदा दे दो दोनों को मंत्रिमंडल में रखेंगे. अगर ऐसा ही करना था तो समिति का गठन करने की क्या ज़रुरत थी."

उन्होंने कहा, "सरकार का मसौदा और जनलोकपाल विधेयक का मसौदा पहले से ही तैयार था, अगर इन्हीं दोनों मसौदों को मंत्रिमंडल के सामने रखना था तो इतना समय बर्बाद करने की क्या ज़रुरत थी. इससे तो साफ़ ज़ाहिर हो गया है कि सरकार की इच्छा देश से भ्रष्टाचार मिटाने की नहीं हैं."

उनका कहना है कि सरकार ने जंतर मंतर के अनशन के वक़्त कहा था कि आपकी सब बातों पर विचार करेंगे लेकिन अब वह मुकर गई है.

"मैं इस इरादे पर आ गया कि मैं अपना रुका हुआ अनशन 16 अगस्त से फिर शुरु करूंगा और मेरे शरीर में प्राण है तब तक अनशन करुँगा. इस देश और समाज के एक महत्वपूर्व सवाल के लिए जान भी चली जाए तो परवाह नहीं."

उन्होंने सरकार पर बाबा रामदेव के आंदोलन को तोड़ने मरोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे लाठी और गोली भी खाने के लिए तैयार हैं.

पारदर्शिता का सवाल

नागरिक समिति के एक अन्य सदस्य अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि अब तक सरकार के प्रतिनिधियों के साथ जो भी बैठकें हुई हैं वो एक दिखावा थी.

उनका कहना नागरिक समाज के सदस्यों ने जनता की राय लेते हुए कुल 71 बिंदुओं पर सुझाव दिए थे. 40 बिंदू पहले दिए थे और 31 बाद में.

उनका कहना है कि अब तक सिर्फ़ 40 बिंदुओं को पढ़ा गया है और इनमें से सिर्फ़ 15 बिंदुओं पर चर्चा हुई है और 31 बिंदु तो अब तक पढ़े भी नहीं गए हैं.

केजरीवाल का कहना था, "जब हमारे बिंदुओं के कुल 20 प्रतिशत पर ही चर्चा हुई है और अब सरकार कह रही है कि अपना मसौदा अलग ले आइए और हम अपना मसौदा अलग से ले आएंगे."

उन्होंने सवाल पूछा कि पारदर्शिता पर सरकार एक विधेयक तैयार कर रही है लेकिन वह समिति में हो रही चर्चा को सार्वजनिक नहीं करना चाहते तो इसमें पारदर्शिता की कमी क्यों?

अरविंद केजरीवाल ने सिर्फ़ 11 सदस्यों वाले लोकपाल पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर लोकपाल को ज़िलों के स्तर पर ढाँचा नहीं दिया जाएगा, जैसा कि नागरिक समाज ने प्रस्ताव रखा था, तो लोकसभा का औचित्य ख़त्म हो जाएगा.

उन्होंने न्यायपालिका और संसद सदस्यों को लोकपाल के दायरे में न लाए जाने के सरकार के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए.

सरकार के प्रतिनिधियों के रवैए की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "सरकार जो बिल लाना चाहती है वह दरअसल लोकपाल बिल नहीं जोकपाल बिल है."

प्रशांत भूषण ने कहा कि नागरिक समाज के प्रस्तावों पर चर्चा किए बिना ही सरकार के प्रतनिधियों ने कह दिया है कि दोनों अपना अपना मसौदा तैयार करेंगे.

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि लोकपाल एक स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए जिसे सभी संस्थाओं के भ्रष्टाचार की जाँच करने का अधिकार होना चाहिए. लेकिन जब कुछ मुद्दों पर बहस हुई तो समझ में आया कि सरकार का मॉडल हमारे मॉडल से एकदम अलग है."

नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि अगर सरकार मसौदे पर सहमति बनाना चाहती है तो वे हर दिन बैठक करने के लिए तैयार हैं.

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