सोनिया को एक जुलाई तक का समय

तेलंगाना के लिए आंदोलन
Image caption तेलंगाना के लिए आंदोलन कई बार हिंसक भी हुआ है

आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य की मांग के लिए अभियान चलाने वाले कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी आलाकमान को चेतावनी दी है कि अगर इस महीने के अंत तक उसने इस मुद्दे पर कोई फ़ैसला नहीं किया तो वे त्यागपत्र दे देंगे और 5 जुलाई से आमरण अनशन पर चले जाएँगे.

उन्होंने यह चेतावनी पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लिखे गए एक पत्र में दी. इन कांग्रेसी नेताओं ने राज्य के मंत्री, सांसद, और विधायक सभी शामिल थे. इन नेताओं ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक बैठक की और उसमें यह निर्णय किया गया. यह सख़्त क़दम उठाने का फ़ैसला इस परिप्रेक्ष्य में महत्त्वपूर्ण हैं कि बुधवार को इन नेताओं ने कांग्रेस कोर कमेटी के दो वरिष्ठ सदस्यों गृह मंत्री पी चिदंबरम और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से भेंट की और तेलंगाना पर तुरंत किसी फ़ैसले की मांग की. लेकिन उन्हें इन दोनों केंद्रीय नेताओं से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. जिसके बाद गुरुवार को उन्होंने यह बैठक की.

मांग

सूत्रों के अनुसार इस ग्रुप ने त्यागपत्र जमा करने शुरू कर दिए हैं और अब तक आठ सांसद, छह मंत्री, 22 विधायक और नौ पार्षद अपने त्यागपत्र वरिष्ठ नेता जना रेड्डी के हवाले कर चुके हैं.

अपने पत्र में इन नेताओं ने सोनिया गाँधी से कहा कि संसद के अगले अधिवेशन में तेलंगाना राज्य की स्थापना का बिल लाया जाए और इस फ़ैसले की घोषणा इसी महीने कर दी जाए.

आंध्र प्रदेश की राजनीति किस गति से गरमा रही है, इसका एक अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि तेलंगना के छह मंत्री गुरुवार को हैदराबाद में हुई मंत्रिमंडल की बैठक से दूर रहे. ये नेता तेलंगाना के विषय पर केंद्रीय नेताओं से बातचीत के लिए दिल्ली में पड़ाव डाले हुए हैं.

हालाँकि तेलंगाना में 15 मंत्री हैं जिनमें से दस ही दिल्ली गए थे और उनमें से भी चार मंत्री, कैबिनेट की बैठक में भाग लेने हैदराबाद लौट आए. इससे ये संकेत भी मिल रहे हैं कि कोई सख़्त क़दम उठाने के सवाल पर तेलंगाना के मंत्रियों में अब भी मतभेद हैं.

लेकिन जहाँ तक सांसदों का सवाल है, तमाम 11 लोकसभा सदस्य त्यागपत्र देने के लिए तैयार हैं.

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