कनिमोड़ी की ज़मानत का विरोध

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सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले की अभियुक्त कनिमोड़ी और सहअभियुक्त कलैइनार टीवी के प्रबंध निदेशक शरद कुमार की ज़मानत याचिका का विरोध किया.

सीबीआई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अगर इन लोगों को ज़मानत दी जाती है तो वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं.

सीबीआई ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि कनिमोड़ी और शरद कुमार 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में मुख्य षड़यंत्रकारी थे और कलैइनार टीवी को जो 200 करोड़ रूपए स्थानांतरित किए गए वह रिश्वत का भाग था न कि कर्ज़ का, जैसा का अभियुक्तों ने दावा किया था.

इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट इन दोनों की ज़मानत याचिका ख़ारिज कर चुके हैं.

तर्क

सीबीआई का कहना था कि क्योंकि 2जी मामले पर जांच काफ़ी आगे तक पहुंच चुकी है इसलिए अदालत के लिए ये सही नहीं होगा की वह अभियुक्तों को ज़मानत दे.

सीबीआई का कहना था कि सीबीआई की विशेष अदालत और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी ही सावधानीपूर्वक सभी सबूतों और गवाहों की जांच परख के बाद कहा है कि इन दोनों को ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने 13 जून को सीबीआई से पूछा था कि वह कलैइनार टीवी को कथित तौर पर दिए गए 200 करोड़ रूपये का ब्यौरा अदालत को दे.

ये आरोप है कि 2-जी मामले में गिरफ़्तार किए गए आसिफ़ बलवा से जुड़ी एक कंपनी ने कनिमोड़ी के टीवी चैनेल कलैइनार टीवी को 200 करोड़ रूपये 'क़र्ज' दिए थे. साथ ही ये भी आरोप लगाया गया था कि ये 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए दिया गया रिश्वत है.

कनिमोड़ी कलैइनार टीवी की एक बड़ी शेयर धारक हैं.

डीएमके सांसद कनिमोड़ी की गिरफ़्तारी दिल्ली की एक विशेष अदालत में उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज होने के बाद की गई थी और वह तिहाड़ जेल में कैद हैं.

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