उद्योगपतियों को लुभाने में जुटीं ममता

  • 18 जून 2011
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Image caption ममता बनर्जी ने हाल ही में 34 साल के वामपंथी शासन को ख़त्म करके अपनी सरकारी बनाई है

सिंगूर से टाटा को वापस भेजने और नंदीग्राम में विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) न बनने देने के लिए राजनीतिक आंदोलन से अपनी राजनीति चमकाने वाली ममता बनर्जी अब उद्योगपतियों को लुभाने में लगी हैं.

मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने देश भर के उद्योगपतियों को कोलकाता बुलाया और राज्य में उद्योग लगाने का न्यौता दिया.

उद्योगपतियों की समस्याएँ सुनने के बाद उन्होंने एक कोर कमेटी बनाने की घोषणा की है जिसमें उद्योग-व्यवसाय के प्रतिनिधियों के अलावा सरकारी अफ़सर और दो मंत्री रहेंगे और ये उद्योग लगाने में आने वाली समस्याओं को दूर करेंगे.

इस बैठक में देश भर से डेढ़ सौ से ज़्यादा उद्योगपति शामिल हुए जिनमें गोदरेज कंपनी के आदि गोदरेज और आईटीसी के वायवी देवेश्वर भी थे लेकिन टाटा और अंबानी जैसे बड़े उद्योगपति नहीं आए, सिर्फ़ अपने प्रतिनिधि भेजे.

ज़मीन का मसला

ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री बनने के पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे नहीं चाहतीं कि उद्योग लगाने के लिए ज़मीन का अधिग्रहण सरकार करे.

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Image caption अब ममता बनर्जी सरकार ने सिंगूर की ज़मीन किसानों को लौटाने का फ़ैसला किया है

उनकी राय में ज़मीन का अधिग्रहण उद्योगपति ख़ुद करें.

लेकिन शनिवार की बैठक में उद्योगपतियों की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि वे ज़मीन का अधिग्रहण किस तरह से करेंगे.

उनका कहना था कि अगर वे ज़मीन का अधिग्रहण करेंगे तो बेवजह बिचौलिए आकर उन्हें परेशान करेंगे.

इसके अलावा उद्योगपतियों ने राज्य में सड़क और बिजली जैसी ढाँचागत सुविधाओं की कमी का ज़िक्र किया.

ममता बनर्जी ने इन समस्याओं के बाद राज्य के उद्योग और वित्त मंत्री के नेतृत्व में एक कोर कमेटी के गठन की घोषणा की है.

इस कमेटी में कुल 25 सदस्य होंगे जिनमें चेंबर ऑफ़ कॉमर्स के प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी होंगे.

कहा गया है कि ये कमेटी उद्योग लगाने के रास्ते में आने वाली सारी दिक़्कतों को दूर करेगी.

अभी पिछले हफ़्ते ही ममता बनर्जी की सरकार ने सिंगूर में टाटा मोटर्स की लीज़ ख़त्म करने का क़ानून विधानसभा से पारित किया है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्योगपति उसी सरकार पर किस तरह से भरोसा करते हैं.

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