सीरिया में हिंसक प्रदर्शन, '16 की मौत'

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Image caption टैंकों और सैनिकों के हथियारबंद दस्तों ने दमिश्क के नज़दीकी मारत अल-नुमान और ख़ान शेख़ून शहरों पर कब्ज़ा कर लिया.

सीरिया के राष्ट्रपति अल-असद के विरोध में कई शहरों में प्रदर्शन फिर शुरु हो गए हैं.

खबरों के मुताबिक इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबलों के हाथों अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे ज़्यादा हिंसा सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स में हुई है.

सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनों को कम आंका लेकिन कहा है कि प्रदर्शनों के दौरान कई सैनिकों को गोली मारी गई और उनकी हत्या कर दी गई हैं.

इससे पहले सीरिया के सैन्य बलों ने देश के उत्तरी हिस्से में मौजूद शहरों में घुसकर कई महीनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन को नियंत्रित करने की कोशिश की.

टैंकों और सैनिकों के हथियारबंद दस्तों ने दमिश्क के नज़दीकी मारत अल-नुमान और ख़ान शेख़ून शहरों पर कब्ज़ा कर लिया.

प्रतिबंध की मांग

इस बीच यूरोपीय संघ ने सीरिया पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाने की मांग की है.

सीरियाई सेना की कमान वैसे तो राष्ट्रपति असद और उनके अल्पसंख्यक अलावी समुदाय के हाथ में है, मगर सैनिक अधिकतर सुन्नी समुदाय के हैं और विरोधियों में भी अधिकतर सुन्नी ही हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक मार्च 2011 से अब तक सरकार विरोधी हिंसा में एक हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

मानवाधिकार गुटों का कहना है कि इन विरोध प्रदर्शनों पर शिकंजा कसने के सरकारी प्रयासों के दौरान अब तक कम से कम 13 सौ लोग मारे गए हैं.

'घायलों की गिरफ़्तारी'

सीरिया में जारी हिंसा के इस दौर के बीच बीबीसी सहित ज़्यादातर विदेशी पत्रकारों को देश में घुसने से रोका जा रहा है. यही वजह है हिंसा और मरने वालों की सही जानकारी का पता लगाना मुश्किल है.

होम्स शहर में मौजूद एक चश्मदीद के मुताबिक, ''सुरक्षाबल घायलों को भी गिरफ़्तार कर रहे हैं और उन्हें सैन्य अस्पताल ले जा रहे हैं. वहीं प्रदर्शनकारी एक दूसरे की पूरी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं. घरों में घायलों का इलाज किया जा रहा है.''

लोगों का कहना है कि सैनिक घरों को तबाह कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को हुए विरोध-प्रदर्शनों को सालेह अल-अली को समर्पित जिन्होंने 20सवीं शताब्दी में फ्रांसिसी राज के खिलाफ़ विद्रोह किया था.

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