मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

  • 21 जून 2011
मायावती
Image caption मुख्यमंत्री मायावती ने अभी तक इन मामलों पर सफाई देना ज़रूरी नहीं समझा है.

उत्तर प्रदेश में एक के बाद महिलाओं के साथ बलात्कार और उनकी नृशंस हत्या के मामले सामने आने पर राज्य के मानवाधिकार आयोग ने प्रदेश की मायावती सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जवाब तलब किया है.

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस विष्णु सहाय ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने अख़बारों और मीडिया से मिली जानकारी के आधार पर महिलाओं के खिलाफ़ हुए इन अपराधों का संज्ञान लिया है.

अपने निर्देश में जस्टिस सहाय ने कहा कि बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या से जीवन जीने के बुनियादी अधिकार को ख़तरा पैदा हो गया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं को जीवन के मूलभूत अधिकार के अलावा इज़्ज़त से जीने का बुनियादी हक भी है.

अपने संक्षिप्त निर्देश में जस्टिस सहाय ने कहा, ''जिस पशुता के साथ बलात्कार के ये अपराध किए गए हैं उसके बाद मैं यह कहने से गुरेज़ नहीं करूंगा कि इन अपराधियों से सख्त से सख्त तरीके से निपटना चाहिए.''

आयोग ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और संबंधित ज़िलों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को औपचारिक रुप से नोटिस जारी किए हैं.

नोटिस जारी

आयोग ने कहा है कि सभी लोग 28 जून तक इन मामलों की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपें.

साथ ही सभी वरिष्ठ अधिकारियों को 30 जून को आयोग के सामने पेश होने के लिए भी कहा गया है.

पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या, ज़िंदा जलाने और आंख फोड़ने के 12 से ज़्यादा मामले आए हैं.

इन मामलों को लेकर सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार अपराधों की रोक थाम में नाकाम है और सत्तारुढ़ बहुजन समाज पार्टी के नाजायज़ हस्तक्षेप से पुलिस अपना कम नहीं कर पा रही है.

वहीं सरकार के प्रवक्ता सूचना सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने सफाई देते हुए कहा है कि जो कुछ संभव है किया जा रहा है.

लेकिन ज़्यादातर मामलों में कार्रवाई तभी की गई है जब ये घटनाएं मीडिया में ज़ोर शार से उछाली गईं.

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