नेताओं ने मांगा दैवीय न्याय

  • 21 जून 2011
बी एस येदुरप्पा
Image caption मुख्यमंत्री येदुरप्पा के ऊपर कुमारस्वामी ने भ्रष्टाचार कई आरोप लगाये हैं

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदुरप्पा और उनके घोर राजनीतिक विरोधी और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी अगली जून 27 को भगवान मंजुनाथ के मंदिर में पेश होंगे और अपने अपने दावे दोहराएंगे.

ज़मीन जायदाद के मुक़दमों को सुलझाने के लिए भगवान मंजुनाथ मंदिर की बड़ी मान्यता है.

हालांकि इससे पहले ऐसा कोई ज्ञात मुक़दमा मंदिर में नहीं आया है जिसमें राज्य के दो दिग्गज नेता आमने सामने न्याय की गुहार लगाएं.

आरोप प्रत्यारोप

दरअसल हुआ ये कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने येदुरप्पा पर आरोप लगाए कि वो ज़मीन से जुड़े कई भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त हैं.

उन्होंने ये भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ने उन्हें कुछ लोगों की मार्फ़त 'ख़रीदने की भी कोशिश की है'.

Image caption कुमारस्वामी भगवान मंजुनाथ के मंदिर में अपने आरोप दोहराने के लिए तैयार हैं

राज्य की भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बी एस येदुरप्पा ने इन आरोपों को निराधार बताया और कुमारस्वामी को भगवान मंजुनाथ के दरबार में उपस्थित हो कर अपने आरोप दोहराने की चुनौती दे डाली.

कुमारस्वामी ने इस चुनौती को स्वीकार करने में कोई विलंब नहीं किया और कहा कि वो एक जांच आयोग के सामने भी अपने आरोप दोहराने के लिए तैयार हैं.

कुमारस्वामी ने कहा वो लाई डिटेक्टर टेस्ट के लिए भी राज़ी हैं.

कुमारस्वामी को लिखे एक खुले पत्र में येदुरप्पा ने कहा,"मेरी भगवान में आस्था है, आशा है आपकी भी होगी. इसलिए मैं आपको चुनौती देता हूँ कि आप भगवान के मंदिर में उपस्थित हों और अपने आरोप दोहराएं. मैं आपके साहस की तारीफ़ करूंगा."

'ग़लत तरीका'

लेकिन राज्य के अन्य राजनेता इन दो दिग्गजों के फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्रीरामलू ने कहा है कि राजनीतिक विवादों में मध्यस्थता के लिए भगवान का द्वार नहीं खटखटाना चाहिए.

इसी तरह कॉंग्रेस पार्टी के नेता मोतम्मा के अनुसार दोनों नेताओं की ये हरकत काफ़ी बचकानी है.

मोतम्मा का कहना है कि, "मुख्यमंत्री ने अपने इस क़दम से अपने पद की गरिमा घटाई है".

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