'पुनर्विचार हो पर 2015 से पहले नहीं'

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ब्रिटेन में सांसदों की एक समिति ने कहा है कि भारत को दी जाने वाली आर्थिक मदद पर पुनर्विचार होना चाहिए लेकिन वर्ष 2015 से पहले नहीं.

आर्थिक हालात को देखते हुए ब्रिटेन ने अपने बजट में ज़बरदस्त कटौती की है.

अंतरराष्ट्रीय विकास फंड में कमी नहीं की गई है लेकिन इसके तहत भारत को मिलने वाली मदद पर ब्रिटेन में विवाद चल रहा है.

भारत की बढ़ती सैन्य और आर्थिक शक्ति के कारण कई हलकों में ये बात उठाई जा रही है कि अब भारत को मदद नहीं दी जानी चाहिए.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय विकास समिति ने अब कहा है कि 2015 तक भारत को मदद जारी रहनी चाहिए ताकि ग़रीबी कम करने के ‘शताब्दी विकास लक्ष्यों’ का हासिल किया जा सके. ये लक्ष्य 2015 तक हासिल करने हैं.

कुछ वर्ष पहले तक ब्रिटेन की ओर से सबसे ज़्यादा आर्थिक मदद भारत को ही मिलती थी. अब पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ने वो जगह ले ली है.

मदद मिले या नहीं?

मिलिनियम डिवेलपमेंट गोल के तहत विश्व में ग़रीबी कम करने के प्रति अपनी वचनबद्धता ब्रिटेन दोहराता रहा है.

भारत में 80 करोड़ से ज़्यादा लोग प्रति दिन दो डॉलर से भी कम कमाते हैं. लेकिन अब ब्रिटेन का कहना है कि इस सहायता का थोड़ा बहुत ही असर पड़ता है, इसलिए ये मदद बाद में बंद होनी चाहिए.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस पैसे का ज़्यादा हिस्सा सैनिटेशन यानी साफ़-सफ़ाई पर ख़र्च होना चाहिए. इसके अलावा ब्रितानी सांसदों का कहना था कि जातीगत आधार पर होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है.

ब्रिटेन सरकार ने मदद पाने वाले भारतीय राज्यों की संख्या पहले ही कम कर दी है, अब वो सबसे ग़रीब तीन राज्यों पर ही ज़ोर देगा.

भारत का विकास दर आठ प्रतिशत से भी ज़्यादा है. जबकि इस साल ब्रिटेन का विकास दर 1.5 प्रतिशत ही रहने का अनुमान है.

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