'मॉनसून में सामान्य से कम बारिश होगी'

  • 22 जून 2011
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केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि इस साल मॉनसून के दौरान उम्मीद से कम बारिश होने की आशंका है. 29 मई को केरल में मॉनसून के आगमन के बाद पूर्वानुमान पर दोबारा विचार किया गया है.

विज्ञान और तकनीक मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया, “पूरे देश में मॉनसून के तहत बारिश ‘लॉंग पीरियड एवरज’ (एलपीए) की 95 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है. इसमें चार फ़ीसदी तक की ग़लती हो सकती है.”

लॉंग पीरियड एवरज का मतलब होता है कि पिछले 50 वर्षों में औसतन कितनी बारिश हुई. ये आँकड़ा 89 सेंटीमीटर है.

अप्रैल में मॉनसून पर पहला पूर्वानुमान देते हुए सरकार ने कहा था कि ये सामान्य होगा और ये बारिश लॉंग पीरियड एवरज’ (एलपीए) की 98 फ़ीसदी होगी.

ला नीना प्रभाव कमज़ोर पड़ा

एक जून की संभावित तिथि से पहले ही केरल में 29 मई को मॉनसून की पहली बारिश हो गई थी. अब मॉनसून के तहत होने वाली बारिश के आँकड़ों पर दोबारा विचार किया गया है.

भारतीय मौसम विभाग के निदेशक अजीत त्यागी ने कहा कि विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पूर्वानुमान इसलिए किया गया है जैसे- मॉनसून से जुड़े ला नीना प्रभाव का कमज़ोर पड़ना, इंडियन ओशन पर तापमान में कमी और उत्तरी अटलांटिक के ऊपर प्रतिकूल दवाब.

अजीत त्यागी ने कहा है, जुलाई के पहले चरण में बारिश कम होगी लेकिन दूसरे चरण में ये बढ़ जाएगी. दिल्ली में उम्मीद के मुताबिक 29 जून तक मॉनसून आने की उम्मीद है, राजस्थान में एक जुलाई को.

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