'सुरक्षा में सेंध की जाँच हो'

  • 22 जून 2011
Image caption प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि जांच में कुछ नहीं मिल पाया.

भारतीय जनता पार्टी ने वित्तमंत्रालय में सुरक्षा में सेंध के मामले पर जांच की मांग की है.

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के कार्यालय में 16 अहम जगहों पर कुछ चिपकने वाले पदार्थ पाए गए थे.

भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर लिखा है कि वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के कार्यालय में बगिंग की रिपोर्ट चिंताजनक है.

उन्होंने कहा कि ये भारत का वॉटरगेट काँड है और इसकी व्यापक जाँच कराई जानी चाहिए.

सुषमा ने सवाल उठाए हैं कि क्या सरकार ही अपने वित्तमंत्री के ख़िलाफ जासूसी करवा रही थी या फिर ये किसी कॉर्पोरेट हाउस का काम था.

संदेह के बादल

महत्वपूर्ण है कि पिछले साल सितंबर में प्रणव मुखर्जी के दफ्तर की सुरक्षा में गंभीर सेंध का मामला सामने आया था. वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सीबीडीटी यानि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज की ओर से निजी जाँचकर्ताओं की मदद ली गई थी.

सीबीडीटी की जांच टीम का निष्कर्ष था कि ये चिपकने वाला पदार्थ माइक्रोफोन या छोटे कैमरों को चिपकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

दूसरी ओर अख़बारों में छपी ख़बरों के अनुसार खु़फिया ब्यूरो यानि आइबी ने इसे मामूली च्यूइंगम बताया था. खु़फिया ब्यूरो का कहना था कि ये ऑफिस के सफाई कर्मचारियों की लापरवाही का मामला हो सकता है. मगर, निजी जाँचकर्ताओं का मानना था कि ये किसी ख़ास मकसद से चिपकाई गई थी.

हालांकि दफ्तर में कोई माइक्रोफोन या रिकॉर्डिंग उपकरण नहीं मिला था.

मगर खुद मुखर्जी ने इस मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपने कार्यालय की सुरक्षा में चूक की गोपनीय जाँच कराने का अनुरोध किया था.

हालांकि मंगलवार को प्रणव मुखर्जी ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि जाँच एजेंसियों को नार्थ ब्लाक में उनके कार्यालय की जाँच में कुछ नहीं दिखा, जो पदार्थ मिला वो सिर्फ च्यूइंगम थे.

आरोप-प्रत्यारोप

विपक्ष ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री पी चिदंबरम तक सवाल उठा दिए हैं.

सुषमा स्वराज ने लिखा है कि वित्तमंत्री का इस मुद्दे पर अपना कोई भी मत हो सकता है, वो इसे नज़रअंदाज कर सकते हैं लेकिन, च्यूइंगम थ्योरी को पचा पाना मुश्किल है. उनका कहना है कि कुछ भी हो, ये अपने आप में बड़ी बात है और इसकी जांच होनी ज़रूरी है.

भाजपा प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि अब तो प्रधानमंत्री और प्रणब मुखर्जी के बीच संदेह होने के सुबूत सामने हैं.

सवाल ये भी है कि क्या वित्त मंत्री को गृह मंत्री और उनके गृह मंत्रालय की जाँच एजेंसियों पर भरोसा नहीं रह गया है, जो उन्हें निजी जांचकर्ताओं की मदद लेनी पड़ी.

इस बीच, सरकार ने विपक्ष की जाँच की मांग को ये कहते हुए ठुकरा दिया है कि जाँच हो चुकी है और अब इसकी कोई ज़रूरत नही है.

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