घरेलू नौकरों के लिए स्वास्थ्य बीमा

अंबिका सोनी
Image caption अंबिका सोनी ने कहा कि साढ़े सैंतालिस लाख लोगों को स्कीम का फ़ायदा मिलेगा

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में पंजीकृत घरेलू नौकरों को लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

गुरूवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस पर फैसला लिया गया.

इस स्कीम के तहत सभी पंजीकृत घरेलू नौकरों को स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा, जिसके अंतर्गत बिना किसी नक़दी के वे 30,000 रुपए तक का इलाज करा सकेंगे.

इस योजना के तहत घरेलू नौकर उन्हीं अस्पतालों में इलाज करवा पाएंगे जो सरकार द्वारा निर्धारित सूची के अंदर आते हों.

सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने इस बारे में बताया, "भारत में साढ़े सैतालीस लाख घेरलू नौकर हैं. इन घरेलू कामगारों को चार संस्थाओं से पहचान-पत्र लेना होगा जो ये प्रमाणित कर सके कि वह घरेलू नौकर का काम करते है."

'पूरे नहीं पड़ेंगे पैसे'

घर में खाना बनाने का काम करने वाली पायल सरकार के इस फैसले पर खुशी तो ज़ाहिर करती हैं लेकिन यह सवाल भी उठाती है कि इस महंगाई में 30,000 रुपए से दवा का ख़र्च कैसे चल पाएगा.

पायल कहती है, "अस्पताल में छोटी सी बीमारी के लिए भी जाओं तो फीस ही इतनी महंगी होती है कि यदि भर्ती होना पड़ जाए तो 30,000 रुपये में कैसे चलेगा. सरकार को इस राशि को बढ़ाकर 50 से 60 हज़ार कर देना चाहिए. और सरकार पहचान-पत्र की बात कर रही है तो अगर कोई मालिक या संस्था हमें पहचान-पत्र देने से इंकार कर दे तो हम क्या करेंगे?"

इससे पहले इसी स्कीम में 55 लाख बीड़ी बनाने वाले कामगारों को शामिल किया गया था.

इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए इन घरलू नौकरों को अपना पहचान-पत्र चार संस्थानों में से किन्हीं दो से लेना होगा. वे अपने मालिक, रेसिडेंट वेल्फेयर एसोसिएशन,पंजीकृत मज़दूर संघ या पुलिस से पहचान-पत्र ले सकते है.

केंद्र सरकार इस योजना के अंतर्गत 75 फ़ीसदी ख़र्च उठाएगी और बाक़ी बची राशि की भरपाई राज्य सरकार करेगी. लेकिन पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए 90 फीसदी ख़र्च का वहन सरकार करेगी जबकि शेष 10 प्रतिशत ख़र्च राज्य सरकार उठाएगी.

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