यूपी में डाक्टर की मौत का रहस्य गहराया

  • 24 जून 2011
डाक्टर योगेन्द्र सचान
Image caption डाक्टर सचान का परिवार इसे हत्या का मामला बता रहा है.

डिप्टी सीएमओ डाक्टर योगेन्द्र सचान की लखनऊ जेल में मौत मायावती सरकार के लिए गले का फंदा बनती जा रही है.

डाक्टर सचान लखनऊ में तैनात रहे दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की ह्त्या के षड्यंत्र के अभियुक्त बनाए गए थे.

अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी आत्मह्त्या की सरकारी थ्योरी पर सवालिया निशान लगाते हुए मुख्य सचिव से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

साथ ही साथ मृत डाक्टर की पत्नी डाक्टर मालती सचान ने मुख्यमंत्री मायावती और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इसे 'षड्यंत्र के तहत ह्त्या' बताया है.

लेकिन पुलिस ने अभी तक उनकी रपट दर्ज करना भी जरूरी नहीं समझा है.

डाक्टर सचान की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में लिखा है कि उनके शरीर पर चोट के नौ निशान थे.

इनमे से आठ जगह धारदार हथियार से चोटें मौत से पहले की हैं, जबकि गले में फंदे के निशान मौत के बाद के हैं.

पोस्ट मार्टम में मौत का कारण अत्यधिक खून बहना बताया गया है.

पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के ये तथ्य स्थानीय अखबारों में छापते हुए इसे ह्त्या बताया गया . जस्टिस विष्णु सहाय ने इन्ही ख़बरों का संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया है.

'आत्महत्या नहीं दिखती'

मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ सदस्य जस्टिस विष्णु सहाय ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि, "मुझे यह कहने में कोई संकोच नही है कि मौत के बाद फंदे के निशान मिलना आत्महत्या से मेल नही खाता."

एक जानकार का यह भी कहना है कि अगर फांसी लगाने से हत्या होती है तो गर्दन की वर्टिब्रा जरुर टूटती है.

डाक्टर सचान के परिवार ने राज्य कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह के इस बयान को भी गलत बताया है कि पोस्ट मार्टम के दौरान उनके भाई डाक्टर आरके सचान मौजूद थे.

इस बीच डाक्टर सचान की पत्नी डाक्टर मालती सचान ने मुख्यमंत्री को भेजे गए एक पत्र में लिखा है कि , ''22 जून को मेरे पति की कोर्ट में पेशी थी. बयान में वास्तवकिता न उजागर कर दें, इसलिए इस प्रकरण में संलिप्त लोगों द्वारा मेरे पति की ह्त्या करवा दी गई है.''

ऐसा ही एक पत्र लखनऊ पुलिस को भी दिया गया है. लेकिन पुलिस ने अभी तक परिवार की ओर से रपट दर्ज नही की है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में सिर्फ यह कहा कि श्रीमती सचान का पत्र उन्हें नही मिला है.

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