डीज़ल-गैस के दाम बढ़ाने का विरोध

पेट्रोल के दाम बढ़ाने का विरोध (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption पेट्रोल के दाम बढ़ाए जाने का भी विरोध किया गया था

रसोई गैस, डीज़ल और केरोसिन की क़ीमतें बढ़ाए जाने का विपक्षी दलों ने विरोध किया है. उनका कहना है कि इससे आम जनता पर बोझ पड़ेगा और महंगाई बढ़ेगी.

मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और वामपंथी दलों ने इसके ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन करने की घोषणा की है.

मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने तो दिल्ली में इसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरु भी कर दिया है. उसका कहना है कि ये बढ़ोतरी अस्वाभाविक है.

उसने कहा है कि इसके विरोध स्वरूप सरकार के घटक दलों को अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को देर रात सरकार ने डीज़ल के दामों में तीन रुपए प्रति लीटर, केरोसिन के दामों में दो रुपए प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडरों के दाम पचास रुपए की बढ़ोत्तरी कर दी थी.

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी का हवाला देते हुए कहा था कि इसकी वजह से तेल कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है.

इससे पहले तेल कंपनियों ने पिछले महीने ही पेट्रोल के दाम पाँच रुपए प्रतिलीटर बढ़ाए थे.

'जनता पर बोझ बढ़ेगा'

भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "जिस तरह से पेट्रोलियम पदार्थों ख़ासकर गैस और डीज़ल के दाम बढा़ए गए हैं इससे मंहगाई और बढ़ेगी."

उन्होंने कहा कि ये आम जनता की सरकार नहीं है.

वामपंथी पार्टियों ने सरकार के इस फैसले को निष्ठुर और असंवेदनशील बताते हुए इसके ख़िलाफ़ देशव्यापी आंदोलन करने की घोषणा की है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव एबी बर्धन ने कहा, "या तो सरकार इस वृद्धि पर नियंत्रण करे नहीं तो जनता उन्हें नियंत्रण में आएगी."

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके प्रमुख जे जयललिता ने भी इस वृद्वि का विरोध किया है.

उन्होंने कहा, "हर तरफ क़ीमतें बढ़ रही हैं.ऐसे में ईंधन की क़ीमतों में ये वृद्धि जनता को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी.इसलिए केंद्र सरकार डीज़ल, केरोसिन और एलपीजी की कीमतें बढ़ाने का फैसला तत्काल वापस ले."

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Image caption ममता बैनर्जी ने कहा है कि उनकी पार्टी सरकार के इस फ़ैसले से सहमत नहीं है

यूपीए सरकार का समर्थन कर रही पार्टी तृणमूल कांग्रस पार्टी इस बढ़ोतरी पर नाराज़गी जताई और इसे आम जनता के लिए बोझ बताया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने कहा, "हम इस बढ़ोतरी का समर्थन नहीं करते.हम सरकार में एक घटक दल हैं लेकिन हम इसके पक्षधर नहीं हैं.हम अपना पक्ष पहले ही सरकारी को बता चुके हैं.केरोसिन, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतों में बढो़तरी से आम आदमी पर बोझ पड़ेगा."

उधर वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, "यह बहुत कम बढ़ोतरी है.मैंने शुल्क घटाने का बड़ा ख़तरा उठाया है.आयात शुल्क और उत्पाद शुल्क के रूप में लगभग 49 हज़ार करोड़ रुपए की कटौती की गई है.मैं उम्मीद करता हूँ कि राज्य भी टैक्स कम करेंगे ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके."

उन्होंने इस बढ़ोत्तरी को वापस लेने की संभावना से इनकार किया है.

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