'महंगाई ने तोड़ दी है कमर'

  • 25 जून 2011
सुनैना मेहता
Image caption सुनैना कहती हैं कि महंगाई ने जीना मुश्किल कर दिया गया.

खाना बनाने वाली गैस और डी़ज़ल के दाम में वृद्धि ने सभी की, खासकर गृहिणियों, की नींद उड़ा दी है.

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को देर रात सरकार ने डीज़ल के दामों में तीन रुपए प्रति लीटर, केरोसिन के दामों में दो रुपए प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडरों के दाम पचास रुपए की बढ़ोत्तरी कर दी थी.

दिल्ली के बंगला साहब गुरुद्वारे के बाहर पसीने में लथपथ, हाथ में पानी की बोतल लेकर खड़ी हुई, वीना नागपाल कहती हैं कि किचन के खर्चे को संभालना मुश्किल हो गया है.

सुनैना मेहता कहती हैं कि उनकी जितनी कमाई नहीं होती, उससे ज़्यादा खर्चा हो जाता है और महंगाई ने जीना मुश्किल कर दिया गया.

सुनैना कहती हैं, ‘गैस सिलेंडर के दाम अगर बढ़ाया है तो तनख्वाह भी बढ़नी चाहिए. मेरे पति कहते हैं कि खर्चे पर लगाम लगाओ.’

पास खड़े इन सब बातों को सुन रहे 75-वर्षीय डीपी जोशी भी इस वृद्धि से नाराज़ हैं और वो कहते हैं कि सरकारी फ़ैसले से सभी सामानों के दाम पर असर पड़ेगा.

‘अब तक तो किसी तरह से मध्यम-वर्ग की गाड़ी चल रही थी, लेकिन अब उनकी कमर भी टूटने जा रही है.’

यानि इस फ़ैसले से स्त्री, पुरुष, सभी हताश और गुस्से में हैं.

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