छत्तीसगढ़ में माओवादी हमले, छह सुरक्षाकर्मियों की मौत

नक्सल हमला (फ़ाईल)

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में रविवार को हुए दो अलग-अलग नक्सली हमलों में एक थाना प्रभारी समेत सुरक्षा बलों के छह लोगों की मौत हो गई है जबकि सात घायल हैं.

दंतेवाड़ा ज़िले के किरंदुल थाने के प्रभारी हमले में बुरी तरह से घायल हो गए थे और बताया गया था कि उनका एक पैर धमाके में उड़ गया था. बाद में उनकी मौत हो गई. विस्फ़ोट इतना ज़ोरदार था कि पुलिस वाहन के परखच्चे उड़ गए.

घायलों को हैलीकॉप्टरों के ज़रिए संभागीय मुख्यालय जगदलपुर ले जाने की कोशिश की गई मगर ख़राब मौसम की वजह से ये मुमकिन नहीं हो पाया. बाद में उन्हें वाहनों के ज़रिए अस्पताल पहुँचाया गया.

पुलिस के एक अधिकारी ने कहा है कि देर शाम गश्त पर निकले एक पुलिस दल का वाहन बारूदी सुरंग की चपेट में आ गया जिसमें सवार तीन पुलिसकर्मी मारे गए जबकि चार गंभीर रूप से घायल हो गए थे. घटना के बाद से एक जवान लापता बताया जा रहा है. यह वारदात दंतेवाड़ा में स्थित लोह अयस्क खनन कंपनी, एस्सार, के पटेल पाड़ा कार्यालय के गेट से कुछ ही दूरी पर हुई. अधिकारियों का कहना है कि घटना दस बजे रात की है और घटना स्थल किरंदुल थाने से सिर्फ़ तीन किलोमीटर की दूरी पर है.

दूसरी घटना

दूसरी घटना रविवार की दोपहर की है जिसमे सुरक्षा बलों और माओवादी छापामारों के बीच कांकेर ज़िले के भानूप्रतापुर में हुई मुठभेड़ में सीमा सुरक्षा बल के दो

जवानों की मौत हो गई थी जबकि चार घायल हैं.

पुलिस ने मुठभेड़ में कम से कम आठ छापामारों के मारे जाने का दावा किया है हालांकि सिर्फ़ एक माओवादी छापामार का शव बरामद किया जा सका है.

अधिकारियों ने कहा है कि रविवार दोपहर कोयलीबेड़ा के सुलंगी जंगलों में सुरक्षा बल अपना नियमित अभियान चला रहे थे कि छापामारों ने उनपर हमला बोल

दिया जिसके जवाब में जवानों ने भी कार्रवाई की. बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान के लिए बड़े पैमाने पर केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती की गई है. इनमें सीमा सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय

रिज़र्व पुलिस बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल शामिल हैं.

शरणस्थली

भानुप्रतापपुर महाराष्ट्र की सीमा से लगा है और पुलिस का मानना है कि यह माओवादियों का महत्वपूर्ण शरणस्थल है. इससे पहले शुक्रवार को कांकेर से लगे कोंडागाँव के पास बायानार में माओवादियों नें एक सरकारी हेलीपेड के पास राज्य पुलिस के जवानों पर हमला कर दिया था

जिसमें एक जवान मारा गया था जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

पुलिस को वहाँ से एक एके-47 रायफ़ल और कारतूस भी मिले थे. बरामद हथियार के आधार पर अधिकारियों का दावा है कि बायानार मूठभेड़ में नक्सालियों को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा था. नक्सल विरोधी अभियान में लगे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि अमूमन एके-47 जैसे हथियार माओवादियों के बड़े कमांडरों के

पास होते हैं और ऐसा लगता है कि मूठभेड़ में कोई बड़ा कमांडर मारा गया था. हालांकि पुलिस घटनास्थल से किसी छापामार की लाश नहीं बरामद कर पाई

थी

संबंधित समाचार