'पीएम, न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाना असंवैधानिक'

इमेज कॉपीरइट Reuters

भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस जेएस वर्मा ने कहा है कि प्रधानमंत्री के दफ़्तर और न्यायधीशों को लोकपाल के दायरे में लाना भारतीय संविधान के मूल ढांचे के ख़िलाफ़ होगा.

टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन के डेविल्स एडवोकेट कार्यक्रम को दिए एक इंटरव्यू में जस्टिस वर्मा ने ये विचार व्यक्त किए हैं.

उन्होंने कहा है कि न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाना देश के लोकतांत्रिक ढ़ांचे पर नकारात्मक असर डालेगा.

'केंद्र में राष्ट्रपति शासन का प्रावधान नहीं'

जस्टिस वर्मा ने कहा, "भारत ने जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया है, उसमें प्रधानमंत्री की जवादेही संसद के समक्ष ही होना चाहिए. यदि प्रधानमंत्री का दफ़्तर आम क़ानूनों के दायरे में है तो फिर उसे लोकपाल के दायरे में लाने की ज़रूरत नहीं है. ऐसा प्रधानमंत्री होना उचित नहीं जो काम ही न कर पाए क्योंकि केंद्र में राष्ट्रपति शासन को कोई प्रावधान नहीं है."

ग़ौरतलब है कि लोकपाल विधेयक बनाने के लिए संघर्ष कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की है.

उधर इस संघर्ष का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कहा है कि वे इस मुद्दे पर 16 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करेंगे और अनशन से तब तक नहीं उठेंगे जब तक सरकार लोकपाल बिल पर नागरिक समाज की पूरी बात नहीं मान लेती.

लेकिन जस्टिस वर्मा ने इस धमकी को अलोकतांत्रिक बताया है.

संबंधित समाचार