'डोपिंग के लिए कोच ज़िम्मेदार'

सिनी जोस और मनदीप कौर अपनी टीम के साथ

ये बात सही है कि जिन लड़कियों ने कॉमनवेल्थ खेलों में या फिर एशियाई खेलों में देश का नाम ऊँचा किया, आज वो बदनामी का कारण बन गई हैं.

ऐसा मामला पहली बार सामने नहीं आया है. पहले भी खेलों में हमारे खिलाड़ी पकड़े गए हैं. उनके मैडल वापस हुए और उनकी बहुत बदनामी हुई.

डोपिंग समस्या की मुख्य ज़िम्मेदारी कोचों, डाक्टरों और विभिन्न फ़ेडरेशन पर है.

जब भी मैं किसी कैंप में जाता हूँ तो वहाँ सुईयाँ पड़ी होती हैं. कैंप के अंदर या फिर बाथरूम में सुईयाँ पड़ी रहती हैं. जब स्कूलों में ही बच्चे ऐसी दवाएँ लेनी शुरू कर देते हैं तो वो बड़े होकर इन दवाईयों को क्यों नहीं लेंगे.

कार्रवाई

मेरी राय में मंत्रालय को ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. उन्हें निलंबित करना चाहिए ताकि आने वाले 2012 ओलंपिक खेलों में हमारे देश की बदनामी ना हो. खिलाड़ियों को दिए गए इनाम को वापस लिया जाना चाहिए.

मैं इन खिलाड़ियों को सलाह दूँगा कि वो प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाइयाँ लेने की बजाय मेहनत करें. इन दवाओं से मौत हो सकती है, आप अक्षम हो सकते हैं. इससे देश की बदनामी होती है, आपके माँ-बाप की बदनामी होती है.

मैं कोच और डॉक्टरों को इसलिए ज़िम्मेदार ठहराता हूँ क्योंकि खिलाड़ी उनसे बिना पूछे कोई भी दवा नहीं ले सकता.

ये कोच ही है जो खिलाड़ियों से कहता है कि अगर आप ये दवा लेंगे तो आपका प्रदर्शन अच्छा होगा, आप दूर तक गोला फेंक पाएँगे. खिलाड़ियों को इन दवाओं के बारे में पता ही नहीं होता. तभी मैं कहता हूँ कि कोचों को सज़ा मिलनी चाहिए ताकि आने वाले कोचों को सबक मिले.

डोपिंग की समस्या भारत ही नहीं पूरी दुनिया में फैली हुई है.

(मिल्खा सिंह फ़्लाईंग सिख के नाम से जाने जाते हैं. वो पूर्व ओलंपियन और जाने-माने धावक हैं)

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