बांग्लादेश पर मनमोहन की टिप्पणी से राजनयिक सकते में

  • 1 जुलाई 2011
मनमोहन सिंह इमेज कॉपीरइट ap
Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बाग्लादेश पर की गई टिप्पणी की कड़ी आलोचना हो रही है.

हाल ही में पत्रकारों के साथ हुई एक बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से बांग्लादेश पर की गई टिप्पणी ने भारत में कई राजनयिको को सकते में डाल दिया है.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि बांग्लादेश की 25 प्रतिशत जनसंख्या जमाते-इस्लामी की कसमें खाती हैं और वो भारत विरोधी है.

उन्होंने कहा था, ''ये लोग कई बार आईएसआई के चंगुल में रहते हैं. लेकिन बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य कभी भी बदल सकता है. हमें पता नहीं है कि जिन लोगों का जमाते-इस्लामी पर दबदबा है, वो क्या करने वाले हैं.’

याद रहे कि विदेश मंत्री एसएम कृष्णा बांग्लादेश जाने वाले हैं. प्रधानमंत्री की भी बांग्लादेश जाने की योजना है.

राजनयिकों के लिए प्रधानमंत्री के मुँह से निकले ये शब्द आश्चर्य में डालने वाले हैं क्योंकि माना जाता है कि मनमोहन सिंह विषयों पर सोच समझकर बोलते हैं और चुने हुए शब्दों का प्रयोग करते हैं.

प्रतिक्रिया

बांग्लादेश में भारत के पूर्व उच्चायुक्त देब मुखर्जी कहते हैं कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी जायज़ नहीं है और ज़मीनी हालातों की सच्चाई भी अलग है.

उन्होंने कहा कि पिछले 25 सालों में जमात का वोट प्रतिशत ज़्यादातर चार या पाँच प्रतिशत के आसपास रहा है और उन्हें प्रधानमंत्री का वक्तव्य सुनकर ताज्जुब हो रहा है.

मुखर्जी ने बीबीसी को बताया, ''ये कहना कि बांग्लादेश में राजनीतिक परिवर्तन कभी भी हो सकता है, ये भी अजीब है. बांग्लादेश में जनतांत्रिक प्रगति बहुत अच्छी तरह हो रही है. हो सकता है कि प्रधानमंत्री को सही बातें नहीं बताई गई हों.''

देब मुखर्जी कहते हैं कि प्रधानमंत्री को ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए थीं.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption हंगामे के बाद प्रधानमंत्री दफ़्तर की वेबसाईट से बांग्लादेश पर की गई टिप्पणी हटा ली गई है.

उन्होंने कहा, ''पिछले दो या तीन साल से बांग्लादेश से हमारे संबंध बहुत अच्छे चल रहे थे. आशा करूँगा कि विदेश मंत्रालय से इसका कोई स्पष्टीकरण आएगा.''

बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने भी प्रधानमंत्री के वक्तव्य की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि किसी दूसरे देश के लोगों के बारे में ऐसी बात करना ठीक नहीं है.

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री को 25 प्रतिशत का आंकड़ा किसने दिया.

उधर प्रधानमंत्री के बयान पर हो रही प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री दफ़्तर की वेबसाईट से बांग्लादेश पर की गई टिप्पणी हटा ली गई है.

ये टिप्पणी प्रधानमंत्री की संपादकों से की गई बातचीत की लिखित प्रतिलिपि का हिस्सा थी.

प्रतिलिपि के सबसे ऊपर लिखा है, 'सुधार की गई प्रतिलिपि.'

इस बारे में प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार हरीश खरे से संपर्क नहीं हो सका.

इस बीच बांग्लादेश की एक वरिष्ठ नेता मतिया चौधरी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री फ़िलहाल देश में नहीं और वो इस मामले पर भारत सरकार से ज़रूर जवाब तलब करेंगे.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार