राहुल गोलीकांड के पीड़ितों से मिले

  • 1 जुलाई 2011
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Image caption राहुल इससे पहले उत्तरप्रदेश में भी कथित पुलिस अत्याचार के शिकार लोगों से मिले हैं

कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने बिहार के फारविसगंज इलाक़े का दौरा किया है जहाँ तीन जून को पुलिस फ़ायरिंग में चार व्यक्तियों की मौत हो गई थी.

उन्होंने इस गोलीकांड में मृत और घायल व्यक्तियों के परिजन समेत अन्य लोगों से मिल कर घटना की जानकारी ली.

लेकिन उन्होंने इस बाबत पत्रकारों से कोई बातचीत नहीं की.

शुक्रवार को फारविसगंज शहर से सटी हुई रामपुर पंचायत की एक मुस्लिम-बहुल बस्ती भजनपुर के लोगों ने राहुल गाँधी को अपनी पीड़ा सुनाई. पुलिस फ़ायरिंग में मारे गये चारों व्यक्ति इसी गाँव के थे.

यह घटना वहाँ पास ही बन रही एक स्टार्च फैक्ट्री की उस ज़मीन को लेकर घटी, जिस होकर बने रास्ते से गाँव के लोग वर्षों से आते-जाते थे.

उस भूखंड को जब एक स्थानीय भाजपा नेता से जुड़े व्यावसायिक परिवार ने बिहार औद्योगिक विकास प्राधिकार के ज़रिये लीज पर आवंटित करा लिया तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया.

फिर पुलिस की सुरक्षा में उस भूखंड पर निर्माण कार्य शुरू हो जाने से अपना रास्ता बंद होते देख ग्रामीण भड़क उठे. उनकी उग्र भीड़ गत तीन जून को वहाँ कथित रूप से आगजनी और तोड़फोड़ करने लगी.

लेकिन इस उग्र भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाते हुए घायलों को बूटों से कुचलने की जो बर्बरता दिखाई, वह दृश्य टेलीविज़न पर ख़बरों में आने के बाद ज़्यादती का सबूत बन गया.

दबाव में नीतिश

इस गोलीकांड को लेकर नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ विपक्षी राजनीतिक दलों और ग़ैरराजनीतिक संगठनों के तीखे बयानों और विरोध प्रदर्शनों का ताँता लग जाना स्वाभाविक था.

इसी दबाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना की न्यायिक जाँच कराने का निर्णय किया और घायलों को बूट से कुचलने वाले होमगार्ड जवान को बर्खास्त करके जेल भिजवाया गया.

इसे अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों पर कथित पुलिस ज़्यादती का एक गंभीर मामला मानकर नीतीश सरकार जहाँ अपने बचाव में जुटी है वहीं बिहार में विपक्षी दलों ने इस बाबत ख़ासा हमलावर रुख़ अख्तियार कर लिया है.

मृतकों के निकट संबंधी को अबतक मुआवज़ा नहीं दिये जाने के आरोप का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि न्यायिक जाँच-रिपोर्ट मिल जाने के फ़ौरन बाद ना सिर्फ मुआवज़े की रक़म दे दी जायेगी, बल्कि दोषियों को 'स्पीडी ट्रायल' कराके सख्त सज़ा भी दिलाई जायेगी.

उधर कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दलों ने इस पुलिस फ़ायरिंग को नीतीश राज का असली जनविरोधी चेहरा दिखाने वाला बर्बर गोलीकांड कहा है.

ज़ाहिर है कि राहुल गाँधी के इस फारविसगंज दौरे को भी इसी राजनीतिक नज़रिये से जोड़कर देखा जा रहा है.

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