भारतीय दूत को 'बुलावा'

  • 3 जुलाई 2011
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Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि बांग्लादेश की 25 प्रतिशत जनसंख्या जमाते-इस्लामी की कसमें खाती हैं और वो भारत विरोधी है

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की टिप्पणी पर बातचीत के लिए उन्होंने ढाका स्थित भारतीय राजदूत को बुलाया है.

लेकिन विदेश मंत्रालय ने ये भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने राजदूत को 'समन' नहीं किया है यानि उस भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया है जिसके ज़रिए विदेशी राजदूतों को औपचारिक रूप से बुलाकर नाराज़गी व्यक्त की जाती है.

ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी मीडिया में आ रही उन ख़बरों का खंडन किया है कि राजदूत को ढाका में समन किया गया.

ढाका में उच्चायोग के राजनीतिक सचिव ने कहा है कि वो इन दिनों हर रोज़ भारतीय विदेश मंत्री के बांग्लादेश दौरे पर बातचीत के लिए विदेश मंत्रालय जा रहे हैं.

विदेश मंत्री एसएम कृष्णा छह जुलाई को बांग्लादेश के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं.

जमात का विरोध

प्रधानमंत्री ने पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि बांग्लादेश की 25 प्रतिशत जनसंख्या जमाते-इस्लामी की कसमें खाती हैं और वो भारत विरोधी है. बाद में उनके उस बयान को प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट से हटा लिया गया था.

शनिवार को बांग्लादेश जमादत-ए-इस्लामी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की इस टिप्पणी पर विरोध प्रकट किया था वहीं विदेश मंत्रालय ने इस पर स्पष्टीकरण जारी किया.

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के कार्यकारी महासचिव अज़हरुल इस्लाम ने भारतीय प्रधानमंत्री के वक्तव्य को निंदनीय बताया.

उन्होंने कहा प्रधानमंत्री का बयान ग़लत और बेबुनियाद है और उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है.

इस्लाम ने कहा, "भारत जैसे बड़े देश का प्रधानमंत्री एक आज़ाद और स्वायत्त देश के एक राजनीतिक दल के बारे में ऐसा बेबुनियाद बयान नहीं दे सकता."

स्पष्टीकरण

उधर भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ़ से जारी एक स्पष्टीकरण में कहा गया है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी आधिकारिक नहीं थी.

मंत्रालय के बयान के मुताबिक ये साफ़ किया जाता है कि किसी भी टिप्पणी का मक़सद आलोचनात्मक नहीं था और भारत सरकार और लोगों को बांग्लादेश के लोगों से लगाव है. ‘वो बांग्लादेश के लोगों को सर्वोच्च महत्व देते हैं’.

मंत्रालय के वक्तव्य के मुताबिक, ‘भारत को जनतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के महत्व की पहचान है और वो स्वायत्त देशों के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देने के लिए कटिबद्ध है.’

विदेश मंत्रालय के मुताबिक पिछले कुछ सालों में भारत और बांग्लादेश का आपसी सहयोग कई विषयों में असाधरण स्तर पर पहुँचा है.

आलोचना

मनमोहन सिंह के बयान की कई भारतीय राजनयिकों ने भी आलोचना की है.

उन्होंने कहा था, ''ये लोग कई बार आईएसआई के चंगुल में रहते हैं. लेकिन बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य कभी भी बदल सकता है. हमें पता नहीं है कि जिन लोगों का जमाते-इस्लामी पर दबदबा है, वो क्या करने वाले हैं.’

गौ़रतलब है कि विदेश मंत्री एसएम कृष्णा बांग्लादेश जाने वाले हैं और प्रधानमंत्री की भी बांग्लादेश जाने की योजना है.

प्रधानमंत्री के बयान पर हो रही प्रतिक्रिया के बाद प्रधानमंत्री दफ़्तर की वेबसाइट से बांग्लादेश पर की गई टिप्पणी हटा ली गई थी.

ये टिप्पणी प्रधानमंत्री की संपादकों से की गई बातचीत की लिखित प्रतिलिपि का हिस्सा थी.

प्रतिलिपि के सबसे ऊपर लिखा है, 'संशोधित प्रतिलिपि.'

प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार हरीश खरे ने अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी आधिकारिक नहीं थी और इसे गलती से वेबसाइट पर लगा दिया गया था.

‘निंदनीय’

उधर अज़हरुल इस्लाम ने कहा कि उसका आईएसआई या किसी विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसी से कोई ताल्लुक नहीं है.

इस्लाम ने कहा, "भारतीय एजेंसियों ने मनमोहन सिंह को जमात के बारे में भ्रामक जानकारियाँ देकर बहकाया है."

उन्होंने भारत की तीखी आलोचना की और कहा कि भारत बांग्लादेश को अपने अधीन करना चाहता है.

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