'संसदीय प्रक्रिया के तहत मज़बूत लोकपाल बने'

  • 3 जुलाई 2011
सुषमा स्वराज और अरुण जेटली इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption सुषमा स्वराज ने साफ किया कि सभी दल प्रभावी और मज़बूत लोकपाल के पक्ष में है

लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल संसदीय कार्यप्रणाली के ज़रिए प्रभावी और मज़बूत लोकपाल विधेयक बनाने पर सहमत हुए हैं.

सर्वदलीय बैठक में बीजेपी और वाम दलों समेत कई छोटे दलों ने भी हिस्सा लिए और बैठक के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया जिसमें कहा गया कि सभी दल प्रभावी और मज़बूत लोकपाल के पक्ष में हैं.

सर्वदलीय बैठक के बारे में जानकारी देते हुए लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा, ‘‘ सभी राजनीतिक दल इस बात पर राज़ी हैं कि एक मज़बूत और प्रभावी लोकपाल विधेयक बने और इसे संसदीय प्रक्रिया के अनुसार बनाया जाए.’’

सुषमा स्वराज का कहना था, ‘‘ यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है. सरकार पहले इस विधेयक का आधिकारिक मसौदा मानसून सत्र में संसद के सामने रखे फिर उसे स्थायी समिति को भेजे जहां सभी दल इस पर अपनी राय दें. जन संगठन अपनी राय दें. इस पर चर्चा हो और फिर शीतकालीन सत्र में विधेयक पारित किया जाए.’’

विपक्ष की नेता ने स्पष्ट किया कि वो बैठक में सरकार ने जो विधेयक दिया था उस पर उन्हें आपत्तियां हैं लेकिन वो इन आपत्तियों पर इस बैठक में चर्चा नहीं करना चाहते थे.

उनका कहना था, ‘‘सरकार ने जो मसौदा तैयार किया है उसमें हमें कई आपत्तियां हैं. लोकपाल के चयन, अधिकार क्षेत्र आदि को लेकर लेकिन हमने इस पर बैठक में कुछ नहीं कहा लेकिन ये साफ किया कि सरकार मज़बूत विधेयक लेकर आए.’’

इसी बैठक की शुरुआत में टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि लोकपाल विधेयक जैसा भी हो वो संविधान के दायरे में ही होना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि वर्तमान स्थिति में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क़ानून हैं लेकिन फिर भी ऊंचे पदों पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए एक प्रभावी लोकपाल विधेयक के गठन की ज़रुरत महसूस की जा रही है.

सरकार ने अभी जो मसौदा तैयार किया है उसे बनाने वाली कमिटी में सरकार के पाँच मंत्री और अन्ना हज़ारे के पाँच प्रतिनिधि थे.

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